दिल के रिश्ते : मनाली में डैनमार्क और इटली के दो यंग बने थे यार, चालीस साल बाद मुलाक़ात को खींच लाया संगीत और प्यार
दिल के रिश्ते : मनाली में डैनमार्क और इटली के दो यंग बने थे यार, चालीस साल बाद मुलाक़ात को खींच लाया संगीत और प्यार
विनोद भावुक। मनाली
1980 के दशक में स्कॉटलैंड के अरने प्जेडस्टेड सालोमोंसन एक इटालियन सितार वादक जियानी के साथ मनाली में एक बड़े से लकड़ी के घर में रहते थे। यहीं पर उनकी मुलाकात हुई थी इटली के गैंस से, जो संगीत का सच्चा साधक था। संगीत ने अरने और गैंस की दोस्ती को गहराई दी। कुछ समय बाद दोनों अपने- अपने वतन लौट गए।
चार दशक बीत गए। अरने ने न कभी गैंस से संपर्क किया, न कोई पत्र लिखा, मगर नियति ने ऐसा मोड़ लिया कि एक दिन वह अपने दोस्त गैंस से मिलने निकल पड़े इटली के अस्सीसी की पहाड़ी पर बसे छोटे से गाँव पोरज़ियानो में। दो दोस्तों के मिलन का वो क्षण किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था।
‘सरस्वती हाउस’ तक का यादगार सफर
अरने ने अपनी कहानी को फेसबुक पर शेयर करते हुए लिखा हैं कि इस उम्मीद में कि गैंस मिल जाएगा, वे घंटों तक उबड़-खाबड़ सड़कों और गड्ढों से भरे रास्तों पर पर चलते रहे। आखिरकार वो वहाँ पहुँचे, जहां सामने था गैंस का घर ‘सरस्वती हाउस’। संगीत और सादगी से भरा हुआ घर।
गैंस ने आँखों की रोशनी खो दी थी, लेकिन दिल और सुरों की रोशनी आज भी उतनी ही जीवंत थी। स्वागत हुआ अखरोट के पास्ता, घर की बनी वाइन, जैतून और एक अद्भुत वाद्य प्रस्तुति से। गैंस ने जब अपनी वीणा पर मधुर स्वर छेड़े, तो वो शाम केवल संगीत नहीं, भावनाओं की यात्रा बन गई।
भारतीय संगीत से डोर से बंधे दो विदेशी दोस्त
अरने ने लिखते हैं, उनका स्वागत ऐसे हुआ, जैसे किसी पुराने आश्रम में लौट आए हों। वे कहते हैं, गैंस की आत्मा आज भी सुरों में बसती है। बस इस बार उसने अपनी आँखों से नहीं, दिल से देखा। वे लिखते हैं, समय बीत सकता है, पर संगीत और प्रेम कभी पुराने नहीं होते। संगीत और यादें समय की सीमाओं को तोड़ देती हैं।
दो दोस्तों की पुनर्मिलन का यह प्रसंग संगीत, संस्कृति और मानवीय रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। मनाली की प्राकृतिक छटा से लेकर इटली के अस्सीसी इलाके के शांत पर्वतों तक भारतीय संगीत और आध्यात्मिकता की गूंज सुनाई देती है, जो इस दोस्ती की मजबूत डोर है।
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