कुल्लू की डॉ. रेखा बनीं ठाकुर हिमाचल प्रदेश की पहली डीएमआई सर्टिफाइड फिजियोथेरेपिस्ट, बाल पुनर्वास क्षेत्र में नया इतिहास
कुल्लू की डॉ. रेखा बनीं ठाकुर हिमाचल प्रदेश की पहली डीएमआई सर्टिफाइड फिजियोथेरेपिस्ट, बाल पुनर्वास क्षेत्र में नया इतिहास
हिमाचल बिजनेस। कुल्लू
हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य और बाल पुनर्वास क्षेत्र के लिए यह एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक क्षण है। सम्फिया फाउंडेशन कुल्लू की वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. रेखा ठाकुर ने मुंबई से डीएमई लेवल-बी का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सर्टिफिकेशन हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। इसके साथ ही वे हिमाचल प्रदेश की पहली डीएमआई सर्टिफाइड फिजियोथेरेपिस्ट बन गई हैं।
यह उपलब्धि न केवल डॉ. रेखा ठाकुर के पेशेवर जीवन का एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि हिमाचल प्रदेश में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए उन्नत और वैज्ञानिक उपचार की दिशा में एक मजबूत कदम भी है। यह विशेष प्रशिक्षण अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ डॉ. जेक क्रेइंडलर के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
आधुनिक और प्रमाण-आधारित फिजियोथेरेपी
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. रेखा ठाकुर ने बच्चों के साथ सीधे कार्य करते हुए डीएमआई तकनीकों का गहन व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस अनुभव ने उन्हें मोटर डेले, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और विकास संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुख और वैज्ञानिक उपचार प्रदान करने में सक्षम बनाया है।
डीएमआई एक आधुनिक और प्रमाण-आधारित फिजियोथेरेपी तकनीक है, जो विशेष रूप से बच्चों के लिए विकसित की गई है। यह थेरेपी सही पोश्चर और बॉडी अलाइनमेंट, मांसपेशियों की मजबूती संतुलन और प्रतिक्रिया क्षमता, कार्यात्मक मूवमेंट और आत्मनिर्भरता और दैनिक गतिविधियों की क्षमता को बेहतर बनाने पर केंद्रित होती है।
जीने के लिए सक्षम बनाना है मिशन
डीएमआई का उद्देश्य बच्चों आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने के लिए सक्षम बनाना है। हर बच्चे का उज्ज्वल भविष्य संस्था का विज़न है। सम्फिया फाउंडेशन का मानना है किक आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव है। डॉ. रेखा ठाकुर की उपलब्धि केंद्र में आने वाले हर बच्चे के लिए बेहतर उपचार, बेहतर परिणाम और नई उम्मीदें लेकर आई है।
सम्फिया फाउंडेशन के लिए सबसे बड़ी सफलता वह पल होता है, जब कोई बच्चा मुस्कुराते हुए आत्मविश्वास से कहता है कि मैं कर सकता हूँ या मैं कर सकती हूँ। डॉ. रेखा ठाकुर की यह सफलता प्रदेश के युवा स्वास्थ्य पेशेवरों, विशेषकर महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा है। उनका समर्पण बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।
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