अमेरिका से पढ़ाई कर हिमालय की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में जुटीं डॉ. सोनाली गुप्ता-अग्रवाल
अमेरिका से पढ़ाई कर हिमालय की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में जुटीं डॉ. सोनाली गुप्ता-अग्रवाल
विनोद भावुक। शिमला
डॉ. सोनाली गुप्ता-अग्रवाल ने हिमाचल प्रदेश की संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने का बीड़ा उठाया है। उनका हिमालय केंद्रित शोध और संरक्षण दुनिया के लिए प्रेरक बन गया है। उनका काम केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं है। वे हिमाचल प्रदेश सहित पूरे पश्चिमी हिमालय में सांस्कृतिक चेतना और संरक्षण आंदोलन को नई दिशा दे रहीं हैं।
डॉ. सोनाली गुप्ता ने 2020 में कुल्लू में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चरल एंड हेरिटेज स्टडीज की स्थापना की, जो 2022 में धामी (शिमला) स्थानांतरित हुआ। इस संस्थान का उद्देश्य हिमालय की संस्कृति, इतिहास और कला पर शोध करना, इसके लिए फील्ड स्कूल और ऑनलाइन पाठ्यक्रम तैयार करना तथा पश्चिमी हिमालय में तंत्र पर शोध करना शामिल है।
पुरातात्विक खोजों में विशेषज्ञता
सोनाली गुप्ता का जन्म 5 मई 1975 को हुआ। उनकी माता सिरमौर से और पिता जम्मू-कश्मीर से। उनके पिता भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे। हिमाचल प्रदेश की परंपराओं और पहाड़ी संस्कृति ने डॉ. सोनाली के जीवन का गहरा असर डाला। उनके शोध और संरक्षण प्रयासों में पहाड़ की लोकसंस्कृति का बड़ा प्रभाव झलकता है।
डॉ. सोनाली गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीए ऑनर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए इतिहास और वकालत की डिग्री ली है। इसके बाद उन्होंने अमेरिका से आर्कोलोजी में एमए और मिस्र की पुरातात्विक खोजों में विशेषज्ञता के साथ डॉक्ट्रेट की डिग्री लेकर अमेरिका में आठ साल तक पढ़ाया है। वे कोस्टन इंस्टीट्यूट में डायरेक्टर ऑफ पब्लिक रिसर्च रही हैं।
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चरल एंड हेरिटेज स्टडीज
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चरल एंड हेरिटेज स्टडीज साल 2025 तक 7 फील्ड स्कूल और 225 से ज्यादा ऑनलाइन वार्ता आयोजित कर चुका है। इस संस्थान और अमेरिका आधारित हिमालयन कंजर्वेशन एंड प्रिजर्वेशन सोसायटी कके माध्यम से डॉ सोनाली गुप्ता पर्यावरणीय तकनीकों और पुनर्नवीनीकरण उत्पादों के माध्यम से स्थानीय कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा दे रही हैं।
वे हिमाचल सहित हिमालयी क्षेत्रों में सांस्कृतिक संरक्षण परियोजनाओं में सहयोग करती हैं। वे जल और वास्तुकला के प्रबंधन, महिला अधिकारों और सांस्कृतिक अध्ययन में विशेषज्ञ राय देती हैं। उन्होंने ब्रिटिश म्यूजियम के सहयोग से केरल में मिट्टी के बर्तन पर शोध किया है। वे सांता मोनिका एयरपोर्ट कंजर्वेशन प्रोजेक्ट में सांस्कृतिक संसाधन विशेषज्ञ व यूएस आधारित कम्युनिटोलोजी में सलाहकार हैं।
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