हर तस्वीर कुछ कहती है : 164 साल पहले कैमरे के सामने खड़े होने वाले सबसे पहले शाही व्यक्तियों में शामिल थे राजा जोधबीर चन्द
हर तस्वीर कुछ कहती है : 164 साल पहले कैमरे के सामने खड़े होने वाले सबसे पहले शाही व्यक्तियों में शामिल थे राजा जोधबीर चन्द
हिमाचल बिजनेस। धर्मशाला
19वीं शताब्दी के ब्रिटिशकालीन भारत में 164 साल पहले ली गई एक दुर्लभ तस्वीर के माध्यम से कांगड़ा के प्राचीन राजपुताना वंश की गढ़ी नादौन एक ऐतिहासिक खिड़की खोलती है। इस तस्वीर में नज़र आते हैं राजा जोधबीर चन्द (1823-1872) और उनके तीन पुत्र, जो संभवतः भारत के कैमरे के सामने खड़े होने वाले सबसे पहले शाही व्यक्तियों में शामिल थे। यह तस्वीर वर्ष 1861 में उस समय ली गई थी, जब भारत में कैमरा एक नवीन उपकरण था।
राजा जोधबीर चन्द ने 1823 में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा दी गई नादौन जागीर का भूभाग संभाला। उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आने के बाद भी प्रमुख भूमिका निभाई। उनकी विरासत में न केवल शासकीय जागीरें शामिल थीं, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा बने शाही परिवार की छवि भी थी। यह तस्वीर उस छवि का जीवंत सबूत है। इस तस्वीर की ऐतिहासिक महत्ता अनेक स्तर पर है।
1861 के उस युग में कैमरा भारत में केवल चुनिंदा लोगों के लिए उपलब्ध था। उस दौर में शाही व्यक्तियों का कैमरे के सामने खड़े होना, एक सामाजिक और सांस्कृतिक संकेत था। इस तस्वीर से हमें शाही परिवारों की पोशाक, पारंपरिक मुद्रा और उनके वातावरण का दृश्य मिलता है। 1868 में उन्हें स्टार ऑफ़ इंडिया के नाइट कमांडर की उपाधि भी मिली।
तस्वीर में शायद राजा जोधबीर चन्द के तीन पुत्रों को भी देखा जा सकता है। इतिहासकारों के अनुसार वे मियां प्रणाथ सिंह (1838-1907), मियां हरि सिंह (1840-1903) और मियां शेर सिंह (1844-1900) हो सकते हैं। ये युवा आगे चलकर प्रशासन, राजस्व और ब्रिटिश आधारित शाही व्यवस्था में सक्रिय हुए। इसलिए यह फोटो केवल एक पारिवारिक पोर्ट्रेट नहीं है, उस युग की सामाजिक संरचना, तकनीकी प्रगति और राजनीतिक समीकरणों का एक प्रतिबिंब भी है।
कांगड़ा जिले के इतिहासपरक दस्तावेज बताते हैं कि 1857 की क्रांति के दौरान राज्य के कई पहाड़ी शासक ब्रिटिश राज की ओर झुके थे; राजा जोधबीर चन्द भी उसी पथ पर थे। यह तस्वीर उस बदलते युग की याद दिलाती है, जहाँ पारंपरिक राजशाही, अंग्रेज-तंत्र और कैमरे एक साथ मिलकर नया इतिहास रचने लगे थे। यह तस्वीर मात्र शाही दृश्य नहीं है, यादगार है कि कैसे पहाड़ों के राजा, जागीरों- जमीनों, कलाओं, कौशल और आधुनिकता की धारा में समाहित हो गए।
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