फ़र्स्ट जेन एंटरप्रिनयोर : अनुज बलौरिया ने 21 साल की उम्र में रखी कारोबार की बुनियाद, दो दशक में ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल में बने भरोसे का ब्रांड

फ़र्स्ट जेन एंटरप्रिनयोर : अनुज बलौरिया ने 21 साल की उम्र में रखी कारोबार की बुनियाद, दो दशक में ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल में बने भरोसे का ब्रांड
फ़र्स्ट जेन एंटरप्रिनयोर : अनुज बलौरिया ने 21 साल की उम्र में रखी कारोबार की बुनियाद, दो दशक में ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल में बने भरोसे का ब्रांड
हिमाचल बिजनेस/ शाहपुर
कांगड़ा जिला की शाहपुर तहसील का रैत गांव के शिक्षक दम्पति का बेटा, जिसकी पहचान एक अध्यापक के रूप में बननी थी, लेकिन किस्मत ने उसे कारोबारी बना दिया। यह कहानी है अनुज बलौरिया की, जिन्होंने 21 साल की उम्र में कारोबार की बुनियाद रखी और आज उनका नाम ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भरोसे का प्रतीक है।
एक बस से शुरुआत – 32 मील-रानीताल रूट
साल 2001। अनुज बलौरिया ने अपने माता-पिता के आशीर्वाद और परिवार की आर्थिक मदद से एक बस खरीदी और 32 मील–रानीताल रूट पर बलौरिया ट्रांसपोर्ट की नींव रखी। शुरुआत आसान नहीं थी—ठेठ चंगर इलाके में बस चलाना कई जोखिमों से भरा था।
लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, जोखिम उठाने का साहस और बैंकों का भरोसा, अनुज की सबसे बड़ी ताकत बने। आज, अढ़ाई दशक बाद बलौरिया ट्रांसपोर्ट के बेड़े में 6 बसें हैं और यह सेवा क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुकी है।
जय अम्बे ऑटोमोबाइल – कमर्शियल गाड़ियों का भरोसेमंद ब्रांड
ट्रांसपोर्टर के रूप में सफलता पाने के बाद अनुज ने अपने कारोबार का दायरा बढ़ाया। उन्होंने पार्टनरशिप में रैत और नालटी (पठानकोट–मनाली नेशनल हाईवे) पर अशोका लेलैंड के दो सेल्स एंड सर्विस शोरूम स्थापित किए। इसके साथ ही चंबा में एक बड़ा सर्विस सेंटर भी शुरू किया।
यही नहीं, उनके ब्रांड जय अम्बे ऑटोमोबाइल ने कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री और सर्विस के क्षेत्र में कई रिकॉर्ड बनाए। कुशल प्रबंधन और मेहनती स्टाफ के बल पर अनुज ने इस ब्रांड को भरोसेमंद पहचान दी।
मेहनत, ईमानदारी और भरोसा
अनुज बलौरिया कहते हैं कि इस कारोबार की शुरुआत इसलिए चुनी, क्योंकि इसमें नकद लेन-देन था। मुश्किलें आईं लेकिन उनका हल भी मिला। बैंक ने हमेशा भरोसा किया और मैंने भी कभी भरोसा तोड़ा नहीं।
न कोई लोन डिफॉल्ट, न टैक्स की चूक—यही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। उनकी इस ईमानदारी और मेहनत का नतीजा है कि आज उनके कारोबार से 35 युवाओं को रोजगार मिला है।
परिवार और समाज सबसे पहले
अनुज के पिता स्वर्गीय दर्शन सिंह बलौरिया अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके सपनों की गूंज आज भी अनुज के कारोबार में सुनाई देती है। माता संतोष बलौरिया को गर्व है कि बेटा शिक्षक नहीं बना, लेकिन एक नई राह चुनकर सैकड़ों परिवारों को सहारा दिया।
पत्नी भावना बलौरिया गृहिणी हैं और बेटियां अवंतिका राजपूत और रिधिका राजपूत अभी स्कूल स्तर पर पढ़ाई कर रही हैं। अनुज बलौरिया सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं और परिवार उनकी पहली प्राथमिकता है।
प्रेरक कहानी से मिलती है बड़ी सीख
गांव की मिट्टी से उपजे कारोबारी सितारे अनुज बलौरिया की यह प्रेरक कहानी बताती है कि अगर साहस और मेहनत साथ हों तो युवावस्था में लिया गया निर्णय भी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन जाता है।
एक बस से शुरू हुआ सफर आज बस सेवा, ऑटोमोबाइल शोरूम और सर्विस सेंटर के बड़े नेटवर्क में बदल गया। यह इस बात का संकेत है कि मेहनत और ईमानदारी से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
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Jyoti maurya

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