दुबई से दस्तकारी तक: ‘और्निका’ ने परंपरा को लक्ज़री में बदला
दुबई से दस्तकारी तक: ‘और्निका’ ने परंपरा को लक्ज़री में बदला
विनोद भावुक। शिमला
कभी एक हुक, थोड़ा-सा धागा और सृजन का आनंद, यहीं से शुरू हुई एक ऐसी यात्रा, जिसने हिमालयी हस्तकला को अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों तक पहुंचा दिया। यह कहानी है सेल्फ़न की, जिनकी ब्रांड और्निका आज परंपरा और आधुनिकता के खूबसूरत संगम की पहचान है।
साल 2015 में शौक़ के तौर पर शुरू हुई क्रोशिया की दुनिया जल्द ही जुनून बन गई। दुबई में एक सफल प्रोफेशनल करियर को पीछे छोड़ते हुए सेल्फ़न भारत लौटीं, एक स्पष्ट लक्ष्य के साथ: हाथ से बुनी, उच्च-स्तरीय क्रोशिया को आधुनिक डिज़ाइन भाषा में ढालकर एक लक्ज़री ब्रांड खड़ा करना।
और्निका का हर पीस परंपरा में रचा-बसा है, लेकिन उसकी प्रस्तुति आधुनिक सौंदर्यबोध से निखरी हुई। यही वजह है कि ब्रांड ने ग्रामीण कारीगरी और अंतरराष्ट्रीय फैशन के बीच की दूरी को पाट दिया। लंदन और दुबई जैसे फैशन हब्स में प्रदर्शनों और वर्कशॉप्स के ज़रिये और्निका ने वैश्विक पहचान बनाई।
कौशल और गुणवत्ता की पहचान तब और मजबूत हुई, जब वस्त्र मंत्रालय ने संस्थापक को “मास्टर क्राफ्ट्सपर्सन” के सम्मान से नवाज़ा। लेकिन और्निका की असली ताक़त इसका सामाजिक उद्देश्य है, ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें स्थायी रोज़गार देना, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
सेल्फ़न कहती हैं, ‘परंपरा में जड़ें और आधुनिक संस्कृति में उड़ान, और्निका का यही दर्शन है। आज और्निका सिर्फ़ एक फैशन ब्रांड नहीं, बल्कि उद्देश्यपूर्ण लक्ज़री का प्रतीक है, जहां हर धागा सम्मान, रोज़गार और स्वाभिमान की कहानी बुनता है।
यह यात्रा बताती है कि जब रचनात्मकता को साहस और सामाजिक सोच का साथ मिले, तो शौक़ इतिहास रच देता हैऔर स्थानीय हुनर, वैश्विक मंच पर चमक उठता है।
