गोवा की फ्लिया मार्केट से लेकर कुल्लू के मलाणा तक, 1970 के दशक की ‘हिप्पी ट्रेल’ में ‘मलाणा क्रीम’ और ‘मनाली चरस’ का जादू
गोवा की फ्लिया मार्केट से लेकर कुल्लू के मलाणा तक, 1970 के दशक की ‘हिप्पी ट्रेल’ में ‘मलाणा क्रीम’ और ‘मनाली चरस’ का जादू
विनोद भावुक। मनाली
यह कहानी है 1970 के दशक की, जब भारत आध्यात्मिकता, संगीत और आज़ादी की तलाश में निकले ग्लोबल युवाओं का केंद्र बन गया था। फेसबुक पेज ‘60s, 70s & 80s Trails to India’ पर हाल ही में शेयर की गई दो तस्वीरों ने उस दौर की यादों को फिर ताज़ा कर दिया है।
एक तस्वीर गोवा के फ्लिया मार्केट की है, जहां एक हिप्पी ‘मनाली चरस’ बेचता दिख रहा है। दूसरी तस्वीर मनाली के स्थानीय पर्वतारोही तारा चंद की है, जो विदेशी यात्री माइक सिरल को रोटी बनाना सिखा रहे हैं, ताकि वे छह हफ्तों की पहाड़ी यात्रा पर खुद खाना बना सकें।
हैप्पी ट्रेल — एक युग की यात्रा
फोटो के साथ स्टीफ़न शेफल लिखते हैं, हम फारस से होते हुए काबुल की मशहूर दुकानों तक पहुँचे, जहाँ अफ़ग़ान हैश दुनिया में सबसे बेहतरीन थी। उसके बाद हम भारत आए। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के तोष, मनाली, जाणा की पहाड़ियाँ, रंग और खुशबू आज भी याद हैं।
स्टीफ़न बताते हैं कि उस समय ‘तोश’, ‘मनाली’ और ‘जाणा चरस’ विश्वभर में प्रसिद्ध थी। वे लिखते हैं, कुल्लू से मलाणा तक की घाटी, वहाँ की पार्वती क्रीम एक अलग ही अनुभव थी। हम में से कुछ लोग तो वहीं पहाड़ों में साधुओं के साथ रह गए।
मनाली – हिप्पियों का आध्यात्मिक ठिकाना
तारा चंद जैसे स्थानीय लोग न केवल गाइड थे, बल्कि हिमालयी जीवन के शिक्षक भी। वे विदेशी मेहमानों को बताते कि कैसे स्थानीय संसाधनों के सहारे कठिन पर्वतीय यात्राएँ की जा सकती हैं। वे यात्रियों के बीच खासे फेमस थे।
चरस की कहानी और कानून की सीमा
70 के दशक में भारत में भांग और चरस कानूनी थी। विदेशी यात्री इसे भारतीय संस्कृति का हिस्सा मानते थे। 1985 में एनडीपीएस के लागू होने के कर दी गई। उस दौर की मालाणा क्रीम और मनाली चरस आज भी विश्वभर में एक सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में याद की जाती हैं।
इस कहानी में नशे से ज़्यादा बात है संस्कृति, संगीत, मिलन और आत्म-खोज की। हिप्पी ट्रेल पर निकले यात्रियों के लिए भारत सिर्फ़ एक देश नहीं, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा थी। मनाली और कुल्लू की घाटियों ने उस युग में पूर्व और पश्चिम की सभ्यताओं को जोड़ा।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/many-short-stories-and-poems-written-by-ashok-dard-the-author-of-timeless-poems-like-main-kaviye-di-laadi-have-been-translated-into-punjabi-marathi-and-bengali/
