दादी के नुस्खों से वैज्ञानिक विश्वास तक: ‘उर्क आयुर्वेदा’ की उपचारक यात्रा
दादी के नुस्खों से वैज्ञानिक विश्वास तक: ‘उर्क आयुर्वेदा’ की उपचारक यात्रा
विनोद भावुक। शिमला
कभी-कभी सबसे बड़ी खोज प्रयोगशालाओं में नहीं, बल्कि घर की यादों में छिपी होती है। यह कहानी है सपना वर्मा की, जिन्होंने पहाड़ों की परंपरा, परिवार के अनुभव और आधुनिक विज्ञान को एक सूत्र में पिरोकर उर्क आयुर्वेदा को जन्म दिया।
मातृत्व के बाद बालों के अत्यधिक झड़ने और लगातार थकान से जूझती सपना ने समाधान बाहर नहीं, भीतर ढूंढा। शिमला की पहाड़ियों से आई अपनी पहाड़ी दादी की सीख, पीढ़ियों पुराने हिमालयी तेल-नुस्खे—याद आए। इन परंपरागत विधियों ने न केवल शारीरिक राहत दी, बल्कि मन को भी संतुलन दिया। सपना समझ गईं कि उपचार सिर्फ़ शरीर का नहीं, मन का भी होता है।
जो शुरुआत परिवार की देखभाल से हुई, वही एक बड़े उद्देश्य में बदल गई। सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए ‘उर्क आयुर्वेदा’ को BIC-HPU (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय) में इनक्यूबेशन मिला और उत्पादों का शोध आईआईटी मंडी के सहयोग से किया गया। परंपरा को विज्ञान का सहारा मिला और भरोसा मज़बूत हुआ।
आज उर्क आयुर्वेदा लैब-टेस्टेड, टॉक्सिन-फ्री हिमालयी मसाज ऑयल्स के लिए जाना जाता है। सावधानी से चुनी गई जड़ी-बूटियाँ, सौम्य फ़ॉर्म्युलेशन और शोध-आधारित प्रक्रियाएँ, यही इसकी पहचान हैं। नतीजा? 10,000+ उपयोगकर्ताओं का भरोसा
सपना वर्मा कहती हैं, “जब उपचार प्रेम, देखभाल और परंपरा से मार्गदर्शित हो—तो कुछ भी अधूरा नहीं रहता।”और बार-बार लौटने वाला समुदाय। ‘उर्क आयुर्वेदा’ की कहानी बताती है कि जब परंपरा को विज्ञान से जोड़ा जाए, तो उपचार विश्वास बन जाता है। यह सिर्फ़ एक ब्रांड नहीं, यह पहाड़ों की विरासत, आधुनिक शोध और आत्म-देखभाल की साझा यात्रा है, जो हर घर तक संतुलन और सुकून पहुंचा रही है।
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