राजसी शान से कॉरपोरेट कल्चर तक : मंडी रियासत की राजकुमारी इंदिरा कुमारी जो ‘महिंद्रा’ परिवार की बहू बनीं

राजसी शान से कॉरपोरेट कल्चर तक : मंडी रियासत की राजकुमारी इंदिरा कुमारी जो ‘महिंद्रा’ परिवार की बहू बनीं
राजसी शान से कॉरपोरेट कल्चर तक : मंडी रियासत की राजकुमारी इंदिरा कुमारी जो ‘महिंद्रा’ परिवार की बहू बनीं
विनोद भावुक। मंडी
मंडी रियासत की राजकुमारी इंदिरा कुमारी भारत के प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने ‘महिंद्रा’ परिवार की बहू रहीं। 1938 में जन्मी इंदिरा कुमारी, मंडी के अंतिम शासक राजा जोगिंदर सेन की सुपुत्री थीं। उनकी माता रानी कुसुम कुमारी, गुजरात के राजपीपला राजघराने से थीं। इंदिरा कुमारी का उद्योग जगत के सुरेश महिंद्रा से विवाह बंधन में बंधीं, जो केशुब महिंद्रा के भाई थे।
इंदिरा कुमारी का जीवन उस संक्रमणकाल का प्रतीक है, जब भारत की रियासतें लोकतांत्रिक गणराज्य का हिस्सा बनीं और कई शाही परिवार आधुनिक उद्योग, शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जुड़ गए। उनका विवाह केवल दो परिवारों का संबंध नहीं था, बल्कि उस दौर में यह राजसी परंपरा और आधुनिक उद्योग जगत का संगम था।
सामाजिक-आर्थिक कहानी की नायिका
राजपीपला, जो आज गुजरात राज्य में स्थित है, 1960 से पहले एक स्वतंत्र रियासत के रूप में पहचाना जाता था। चूंकि ननिहाल राजपीपला में था, इस लिए इंदिरा कुमारी के व्यक्तित्व में हिमाचल प्रदेश और गुजरात दोनों शाही परंपराओं की गरिमा समाहित थी। उनके इन्हीं गुणों के चलते वे भारत के प्रसिद्ध औद्योगिक परिवार महिंद्रा के परिवार का हिस्सा बनीं।
मंडी और राजपीपला की विरासत इंदिरा महिंद्रा समूह की औद्योगिक पहचान से जुड़कर एक नई सामाजिक-आर्थिक कहानी गढ़ती है। इंदिरा कुमारी महिंद्रा का जीवन केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहा, उसने आधुनिक भारत के निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाई। मंडी की पहाड़ियों से लेकर कॉरपोरेट बोर्डरूम तक, उनकी यह यात्रा भारतीय समाज के बदलते स्वरूप की प्रेरक मिसाल है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक निकटता
परिवारिक सूत्रों के अनुसार, मंडी और राजपीपला परिवारों के बीच पहले से ही मैत्रीपूर्ण संबंध और दूर के रिश्ते थे। ऐसे में इंदिरा के महेंद्रा से वैवाहिक संबंध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक निकटता का स्वाभाविक विस्तार था। महिंद्रा परिवार भारत की अग्रणी कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा से जुड़ा है, जो ऑटोमोबाइल, कृषि उपकरण और कई अन्य क्षेत्रों में वैश्विक पहचान रखती है।
इंदिरा कुमारी ने 80 साल का एक लंबा जीवन जिया। सुर्खियों में रहने के बजाए पर्दे के पीछे रह कर उन्होंने परिवार और कारोबार में खास भूमिका अदा की। मंडी शहर में यह नाम डेढ़ दशक पहले तब सुर्खियों में आया था, जब मंडी के राजमहल सौदे का पर्दाफ़ाश हुआ था। उस समय इंदिरा महेंद्रा की पावर ओ अटॉर्नी खूब चर्चा में आई थी। मंडी राजघराने की यह बेटी 2018 में दिवंगत हुईं।
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Jyoti maurya

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