प्रयोगशाला से पहाड़ों तक: ‘ब्रहम एग्रो एंड बायोटेक’ ने हिमालयी गोल्ड को दिया वैज्ञानिक भविष्य

प्रयोगशाला से पहाड़ों तक: ‘ब्रहम एग्रो एंड बायोटेक’ ने हिमालयी गोल्ड को दिया वैज्ञानिक भविष्य
प्रयोगशाला से पहाड़ों तक: ‘ब्रहम एग्रो एंड बायोटेक’ ने हिमालयी गोल्ड को दिया वैज्ञानिक भविष्य
विनोद भावुक। शिमला
जब विज्ञान, संकल्प और उद्यमिता एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो इतिहास रचता है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है कंचन शर्मा की, जिन्होंने शोध को रोज़गार और जैव-नवाचार को टिकाऊ कृषि से जोड़कर हिमाचल को नई पहचान दिलाई। बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री और CSIR-NET (लाइफ साइंसेज़) में ऑल इंडिया रैंक 34 हासिल करने वाली कंचन शर्मा की यात्रा अकादमिक उत्कृष्टता से शुरू हुई। फार्मास्यूटिकल उद्योग में क्वालिटी एश्योरेंस और केन्द्रीय विद्यालय में विज्ञान शिक्षिका के अनुभव ने उन्हें अनुशासन और सटीकता सिखाई। लेकिन उनका सपना नौकरी से आगे था—एप्लाइड बायोटेक्नोलॉजी को सस्टेनेबल एग्रीकल्चर से जोड़ना।
साल 2018 में कंचन ने एक चुनौती स्वीकार की—हिमालयी क्षेत्रों में दुर्लभ मानी जाने वाली औषधीय फफूंद कॉरडीसेप्स मिलिटैरिस की नियंत्रित खेती। वर्षों के शोध, प्रक्रिया अनुकूलन और असफलताओं से सीख के बाद उन्होंने वह कर दिखाया, जो क्षेत्र में कम ही हुआ था। इस औषधीय मशरूम को अक्सर “हिमालयन गोल्ड” कहा जाता है—और कंचन ने इसे वैज्ञानिक, टिकाऊ और सुलभ बनाया।
लंबे प्रयोगों के बाद 2021 में ब्रहम एग्रो एंड बायोटेक एक पूरी तरह ऑपरेशनल बायोटेक यूनिट के रूप में स्थापित हुआ। आज यह उद्यम हिमाचल प्रदेश का पहला व्यावसायिक कॉरडीसेप्स मिलिटैरिस उत्पादक होने का गौरव रखता है। इसका फ्लैगशिप ब्रांड “हिमालयन गोल्ड” गुणवत्ता और भरोसे का पर्याय बन चुका है। कंचन कहती हैं, ‘हमारा विज़न है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों के दुर्लभ लाभों को सस्टेनेबल और नियंत्रित खेती के ज़रिये सभी तक पहुंचाया जाए।’
यह कहानी सिर्फ़ एक स्टार्टअप की नहीं, यह विज्ञान के सामाजिक उपयोग, स्थायी कृषि, और स्थानीय नवाचार की कहानी है। ब्रहम एग्रो एंड बायोटेक ने दिखाया कि अगर दृष्टि वैज्ञानिक हो और इरादे मज़बूत, तो पहाड़ों में भी उच्च-मूल्य जैव-उद्यम खड़े किए जा सकते हैं। ‘ब्रहम एग्रो एंड बायोटेक’ हिमाचल के लिए एक नई दिशा है, जहां रिसर्च से रिज़ल्ट, प्रयोग से उत्पादन और ज्ञान से रोज़गार पैदा होता है। यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो विज्ञान को समाज के काम में लाना चाहता है, क्योंकि भविष्य वहीं बनता है, जहां ज्ञान धरती से जुड़ता है।
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Jyoti maurya

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