अमृतसर की हेलेन ने की डॉक्टरी की पढ़ाई, शिमला में जिंदगी कला के संरक्षण के लिए लुटाई

अमृतसर की हेलेन ने की डॉक्टरी की पढ़ाई, शिमला में जिंदगी कला के संरक्षण के लिए लुटाई
अमृतसर की हेलेन ने की डॉक्टरी की पढ़ाई, शिमला में जिंदगी कला के संरक्षण के लिए लुटाई
विनोद भावुक। शिमला
ब्रिटिश शिमला की अनसुनी कहानी में आज किस्सा उस महिला डॉक्टर का, जो मेडिकल की पढ़ाई के बावजूद कला के लिए समर्पित रही। कला पारखी हेलेन चमन लाल आधुनिक भारतीय कला की आत्मा कही जाने वाली हंगरी मूल की शिमला की मशहूर भारतीय चित्रकार अमृता शेरगिल की करीबी मित्र थी और अमृता शेरगिल ने 1938 में उनका मशहूर पोर्ट्रेट बनाया था।
हेलेन चमन लाल शिमला में मिनिएचर पेंटिंग्स के संग्रहकर्ता के तौर पर मशहूर थीं। कलाकारों के प्रति उनकी गहरी समझ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके संग्रह में मिनिएचर पेंटिंग की रीढ़ कहे जाने वाले गुलेर के पेंटर नैनसुख की कृतियां शामिल थीं। उनके पास पारंपरिक आभूषणों की दुर्लभ और बड़ी कलेक्शन मौजूद थी।
कला की संभाल में जुटी रहीं डॉक्टर
हेलेन चमन लाल ने साल 1934 में मेडिसिन में स्नातक किया, लेकिन डॉक्टर के रूप में अभ्यास नहीं किया। वे डॉक्टर बनीं, लेकिन कला की साधिका रहीं। 1936 में भारतीय राजनेता एवं राजनयिक दिवान चमन लाल से शादी के बाद हेलेन शिमला के मशोबरा में बस गईं। देवदारों से घिरा उनका निवास कलात्मक मिलन स्थल बन गया।
विवान सुंदरम अपनी पुस्तक, ‘अमृता शेरगिल : ए सेल्फ पोट्रेट एंड राइटिंग्स’ में लिखते हैं कि हेलेन के माशोबरा वाले घर में देश–विदेश के विचारक, लेखक और कलाकार आते थे और राजनीति से ज़्यादा संवेदना और सौंदर्य और कला की चर्चा होती थी। मशोबरा का वह घर इसलिए चर्चित था, क्योंकि वहां कला सांस लेती थी।
बिना मंच पर आए, इतिहास को दी दिशा
हेलेन कला, विचार और सांस्कृतिक संवाद के मंच का उभरता चेहरा थीं, जिन्होंने बिना मंच पर आए, इतिहास को दिशा दी। हेलेन अपने दौर की उन महिलाओं में थीं, जो भले ही खुद कलाकार नहीं थीं, लेकिन भारतीय आधुनिक कला के इतिहास में उनकी भूमिका मौन लेकिन निर्णायक रही। जब अमृता शेरगिल ने उनका पोर्ट्रेट बनाया तो भारतीय कला इतिहास में दर्ज हो गई।
2013 में पेंगुइन से प्रकाशित यशोधरा डालमिया की पुस्तक, ‘अमृता शेरगिल : ए लाइफ’
में लिखते हैं कि यह वही दौर था जब शिमला और उसके आसपास के इलाके बौद्धिक भारत की प्रयोगशाला बन रहे थे।जब स्त्रियों की पहचान अक्सर सीमित कर दी जाती थी, तब हेलेन कला को संरक्षण दे कर भारतीय आधुनिकता को आकार दे रही थीं।
अमृता शेरगिल के पत्रों में हेलन का जिक्र
हेलेन का जन्म अमृतसर के पठान बेरिस्टर बहादुर इस्लाम ली और उनकी ब्रिटिश पत्नी वोलेट लव के घर संभववत: 1910 या 1912 में हुआ था। उनकी बहन लीला की शादी बेरिस्टर एम सेखरी से हुई थी, जो भारत के 13वें मुख्य न्यायधीश रहे। अमृता शेरगिल ने अपने पत्रों में लिखा कि हेलेन चमन लाल दंपती उनके लिए परिवार जैसे थे।
बताया जाता है कि दिसंबर 1941 में जब अमृता शेरगिल की मौत हुई, उस वक्त वे उनके साथ थीं। जीवन के अंतिम वर्षों में वे इंग्लैंड चली गईं और वहीं 2003 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी स्मृति आज भी अमृता शेरगिल की कूची शिमला की पहाड़ियों और भारतीय कला-संस्कृति के इतिहास में जीवित है।
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Jyoti maurya

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