जर्मनी के हर्मन गोट्ज़ ‘अर्ली वुडन टेंपल्स ऑफ चंबा’ के जरिये दुनिया के सामने लाए चंबा की सांस्कृतिक विरासत
जर्मनी के हर्मन गोट्ज़ ‘अर्ली वुडन टेंपल्स ऑफ चंबा’ के जरिये दुनिया के सामने लाए चंबा की सांस्कृतिक विरासत
विनोद भावुक। चंबा
धौलाधार और पीर पंजाल की गोद में बसी चंबा घाटी अपने ऐतिहासिक मंदिरों, राजमहलों और लोक कलाओं के लिए जानी जाती है। चंबा की कला और संस्कृति के अध्ययन में जर्मनी के हर्मन गोट्ज़ का योगदान प्रेरक है। प्रसिद्ध कला इतिहासकार और संग्रहालय निदेशक गोट्ज़ ने प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय चित्रकला के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
1936 में, गोट्ज़ और उनकी पत्नी अन्निमारी भारत आए। 1939 में उन्हें बारोड़ा संग्रहालय और चित्रगृह का निदेशक नियुक्त किया गया। उन्होंने संग्रहालय में भारतीय कला की धरोहर को संरक्षित करने और जनता तक पहुंचाने का काम किया। वे अपनी पुस्तक ‘अर्ली वुडन टेंपल्स ऑफ चंबा’ के जरिये चंबा कला और संस्कृति को दुनिया के सामने लाये।
चंबा अपनी शाही विरासत और मंदिरों के भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। गोट्ज़ के अध्ययन ने कला के इन पहलुओं को वैश्विक दृष्टि से समझने में मदद की। उन्होंने दिखाया चंबा के राजाओं और राजमहलों के चित्र मुगल और स्थानीय शैली का मिश्रण हैं। गोट्ज़ के शोध ने स्पष्ट किया कि भारतीय कला में हर रंग, रूप और पोशाक के पीछे गहन सामाजिक और ऐतिहासिक अर्थ छिपा होता है।
हर्मन गोट्ज़ ने दिखाया कि कला सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और समाज का दर्पण है। चंबा की घाटियों में बने मंदिर, महल और भित्ति चित्र सिर्फ पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि कला और संस्कृति की गहन समझ का स्रोत हैं। गोट्ज़ के अध्ययन और संरक्षण से चंबा की कला को विश्व स्तर पर नई पहचान और सम्मान मिला।
हर्मन गोट्ज़ का जन्म 17 जुलाई 1898 को जर्मनी के कार्ल्सरुहे में हुआ था। उन्होंने म्यूनिख यूनिवर्सिटी से कला इतिहास में डॉक्टरेट की। शुरू में उनका ध्यान पर्शिया और ओटोमन कला पर था, लेकिन बाद में उनकी रुचि भारत की मुगलकालीन लघुचित्र में बढ़ी। इसलिए वे जर्मनी से भारत आए और बड़ौदा में रहते हुये भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण का काम किया।
उन्होंने बड़ौदा संग्रहालय में म्यूजियोलॉजी विभाग की स्थापना की और विश्वविद्यालय में कला इतिहास पढ़ाया। उन्होंने भारतीय कला को संरक्षित करने और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का कार्य किया। उनका संदेश साफ है कि अपनी कला, संस्कृति और इतिहास को समझो, संरक्षित करो, और इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाओ।
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