‘हॉटस्पॉट’ : डोलमा की चाय की दुकान, दुनिया भर के सैलानियों का अड्डा
‘हॉटस्पॉट’ : डोलमा की चाय की दुकान, दुनिया भर के सैलानियों का अड्डा
विनोद भावुक। मनाली
इंटरनेशनल टूरिस्ट डेस्टिनेशन मनाली का वशिष्ठ गांव आज भले ही कैफ़े, गेस्ट हाउस, टैक्सियों और पर्यटकों की भीड़ से भरा दिखता हो, लेकिन 1970 के दशक की तस्वीर बिल्कुल अलग थी। उस दौर में वशिष्ठ में सिर्फ़ एक ही ‘हॉटस्पॉट’ हुआ करता था। आधी सदी पहले वशिष्ठ गांव में डोलमा की चाय की दुकान दुनिया भर के सैलानियों का खास अड्डा होती थी।
स्थानीय बुजुर्ग लोग आज भी याद करते हैं कि जो भी विदेशी बैकपैकर उस समय वशिष्ठ पहुंचता, डोलमा की दुकान पर चाय ज़रूर पीता था। मिट्टी की दीवारें, लकड़ी के तख्त, और चूल्हे पर उबलती तिब्बती सुगंध वाली चाय। यही था वशिष्ठ का पहला टूरिस्ट कैफ़े।
मनाली में नहीं था कोई ऑटो
उस ज़माने में एक और जगह मशहूर थी नंदिनी डेयरी। यह जगह खुद को कभी इंडिया की सबसे ऊंची दूध डेयरी तो कभी दुनिया की सबसे ऊंची डेयरी बताती थी। उस दावे में कितनी सच्चाई थी, यह आज भी मज़ाक का विषय है, लेकिन पर्यटकों के लिए यह खूब आकर्षण का केंद्र थी।
सड़कें सुनसान, गाँव शांत और पर्यटक उन गिने-चुने घरों और दुकानों में बैठकर घंटों बातचीत करते रहते। मनाली में एक भी ऑटो-रिक्शा नहीं था। अगर एक भी एंबेसडर टैक्सी वशिष्ठ के मैदान में आ जाती तो यह दुर्लभ नज़ारा होता था। लोग टैक्सी को देखने के लिए दूर- दूर से यहां आ पहुंचते थे।
चाय की दुकान, यात्राओं का पड़ाव
डोलमा की दुकान सिर्फ चाय की दुकान नहीं थी। यह बैकपैकरों का इंटरनेशनल मीटिंग पॉइंट था। भारत, यूरोप, अमेरिका, इज़राइल, हर जगह के यात्री यहाँ बैठकर यात्रा की कहानियाँ, नक़्शे, संगीत और कई बार जीवन के गहरे दर्शन एक- दूसरे साझा करते थे।
आज वशिष्ठ गांव बदल गया है। बहुत से कैफ़े हैं, ट्रैफिक है, भीड़ है, लेकिन डोलमा की उस छोटी सी चाय दुकान की महक अभी भी वहां की हवा में महसूस की जा सकती है। यह कहानी उस दौर की है जब मनाली में पर्यटन का बीज बोया जा रहा था।
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