मनाली के शानदार अतीत और खतरनाक भविष्य की तस्वीरें, अमेरिका के कियोकी के माथे पर उभरी चिंता की लकीरें
मनाली के शानदार अतीत और खतरनाक भविष्य की तस्वीरें, अमेरिका के कियोकी के माथे पर उभरी चिंता की लकीरें
विनोद भावुक। मनाली
आधी सदी पहले तक हिमालय की गोद में बसी मनाली की वादियाँ कभी विदेशी यात्रियों के लिए शांति, प्रकृति और आत्मिक सुकून का प्रतीक हुआ करती थीं। अमेरिका के हवाई में रहने वाले कियोकी ने 1970 के शुरुआती वर्षों में मनाली में कई गर्मियां बिताई हैं। वे अपनी स्मृतियों में उस मनाली को देखते हैं, जब ब्यास नदी के ऊपर, मनाली के उत्तर में एक शांत, सौम्य स्थान पर रहा करते थे।
उस दौर में मनाली, कम भीड़ वाला, प्रकृति से गहराई से जुड़ा और यात्रियों के लिए एक आत्मीय ठिकाना था। विदेशी बैकपैकर, स्थानीय लोग नदी, जंगल, पहाड़ सब एक सहज तालमेल में जीते थे। मनाली उस दौर में स्वर्ग की अनुभूति देता था। कियोकी उसी मनाली को याद करते हुए गहरी चिंता जताते हैं।
यादों और यथार्थ की तड़प
कियोकी की यह याद आज के यथार्थ से टकराती है तो वे तड़प उठते हैं। पिछले कुछ सालों में अत्यधिक मानसूनी बारिश ने मनाली और आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया है। भूस्खलन, उफनती नदियाँ, टूटती सड़कें और उजड़ते घर, यह अब केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए कड़ी चेतावनी है।
कियोकी मनाली के बारे में एक सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखते हैं कि वे उन पुराने दोस्तों के बारे में सोच रहे हैं, जो आज भी वहाँ रहते हैं और इन कठिन हालात से गुजर रहे हैं। यह सिर्फ़ एक पर्यटक की संवेदना नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की आवाज़ है, जिसने हिमालय को आज से पचास साल पहले उसके निर्मल रूप में देखा और जिया है।
जलवायु परिवर्तन की कड़वी सच्चाई
कियोकी की बात यहीं खत्म नहीं होती। वे साफ़ शब्दों में चेतावनी देते हैं कि दुर्भाग्य से, आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएँ और आम होती जाएँगी। उनका यह बयान मनाली तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हिमालय, पहाड़ी राज्यों और मानव-प्रकृति संबंध पर एक गहरा सवाल खड़ा करता है।
कियोकी की यह पोस्ट अतीत की सुंदर याद, वर्तमान की पीड़ा और भविष्य की चेतावनी तीनों को जोड़ती है। मनाली केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसे यादों की तरह ही, संरक्षण की भी ज़रूरत है।
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