रोचक और ज्ञानवर्धक : अंग्रेजों के जमाने में कांगड़ा घाटी में डाकसेवा में बड़े काम की थी मेल मोटर वैन

रोचक और ज्ञानवर्धक : अंग्रेजों के जमाने में कांगड़ा घाटी में डाकसेवा में बड़े काम की थी मेल मोटर वैन
रोचक और ज्ञानवर्धक : अंग्रेजों के जमाने में कांगड़ा घाटी में डाकसेवा में बड़े काम की थी मेल मोटर वैन
विनोद भावुक। धर्मशाला
19वीं सदी के मध्य में पूरे भारत में डाक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए पोस्ट ऑफिस एक्ट, 1854 लागू किया गया। डाक विभाग को एक केंद्रीय संगठन का रूप दिया गया, जिसका लक्ष्य देश के हर क़स्बे और गाँव तकडाक पहुंचाना था। उस समय कांगड़ा घाटी घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से भरी थी, जहां संचार बेहद कठिन था। ऐसी परिस्थितियों में डाक सेवा ने अपनी पहुंच बनाई।
प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग के तहत जेफ्री क्लार्क ने ‘The Post Office of India and Its Story’ पुस्तक को ई बुक में तब्दील कर इस शानदार पुस्तक तक पाठकों की ऑनलाइन पहुंच बनाई है। जानना दिलचस्प और प्रेरणादायक है कि कांगड़ा घाटी में डाक सेवा कैसे काम करती थी। पुस्तक में ‘Combined Passenger and Mail Motor Van – Kangra Valley Service’ कैप्शन के साथ एक फोटो प्रकाशित है।
डाक और मुसाफिर साथ- साथ
यह किताब अब सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, जिसमें कांगड़ा घाटी की डाक सेवा की अनोखी तस्वीर प्रकाशित की गई है। इस तस्वीर से साफ होता है कि विशेष रूप से कांगड़ा घाटी में डाक सेवा के लिए एक ऐसी मोटर वैन प्रयोग की जाती थी, जिसमें यात्री भी डाक माल के साथ सफर करते थे। कांगड़ा जैसे क्षेत्र में मोटर वैन का चलना, उस समय के तकनीकी विकास और सेवा विस्तार का प्रतीक था।
उस समय, जब रास्ते कच्चे और घुमावदार थे, डाक पहुँचाने के लिए मोटर वैन का उपयोग किया जाना एक नई सोच और सेवा की प्रतिबद्धता थी। पहाड़ों के निवासियों के लिए डाक सेवा समाचार, ख़बरें और पैसे भेजने का मुख्य तरीका थी। ‘मनी ऑर्डर’ जैसी सुविधाएँ भी उपयोग में लाई जाती थीं। पोस्टमैन ग्रामीण इलाकों में घोड़े अथवा पैदल डाक पहुँचाते थे।
चंबा से जारी होते थे डाक टिकट
ब्रिटिश राज के दौर में चंबा रियासत ने भारत सरकार के साथ ‘पोस्टल कन्वेंशन (डाक समझौता) किया। चंबा में ब्रिटिश इंडिया के टिकटों पर रियासत का नाम ओवरप्रिंट कर के इस्तेमाल किया जाता था। चंबा, के अलावा पटियाला, नाभा, जींद, ग्वालियर और फरीदकोट रियासत ने भी ब्रिटिश सरकार से ऐसा समझौता किया था।
1887 से 1947 तक चंबा ने कन्वेंशन स्टेट के रूप में टिकट जारी किए। इन टिकटों पर अधिकतर ब्रिटिश सम्राट—विक्टोरिया, जॉर्ज पंचम, जॉर्ज षष्ठम्—के चित्र होते थे, जिन पर ‘चंबा’ ओवरप्रिंट किया जाता था। चंबा ने लगभग 120 डाक टिकट और 86 आधिकारिक टिकट जारी किए। 1 जनवरी 1951 से ये टिकट अमान्य हो गए।
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Jyoti maurya

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