हिमालय की सुरक्षा में निवेश, भविष्य के लिए जीवन की सुरक्षा, नागरिक संगठनों ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को लिखा पत्र

हिमालय की सुरक्षा में निवेश, भविष्य के लिए जीवन की सुरक्षा, नागरिक संगठनों ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को लिखा पत्र
हिमालय की सुरक्षा में निवेश, भविष्य के लिए जीवन की सुरक्षा, नागरिक संगठनों ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को लिखा पत्र
हिमाचल बिजनेस। कुल्लू। चंबा
हिमालय देश की जीवनरेखा, लाखों लोगों का घर और देश की जलवायु प्रणाली का दिल है, लेकिन आज यह न केवल प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर रिसाव, भूस्खलन, हिमस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं से लगातार खतरे में है। इसी चिंता के चलते हिमालय नीति अभियान और हिमालय बचाओ समिति जैसे नागरिक संगठनों ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को एक पत्र लिखा है। उनका संदेश स्पष्ट है—हिमालय की सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है।
संगठनों ने केंद्र सरकार से केंद्रीय बजट में हिमालय के लिए समर्पित बजट की मांग की है। यह बजट केवल राहत और पुनर्वास तक सीमित नहीं, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और रोकथाम, हिमालयी राज्यों के लिए क्षेत्र-विशेष जलवायु अनुकूलन योजनाएं, भूस्खलन रोकथाम, ढलान स्थिरीकरण और जलाशय प्रबंधन, ग्लेशियर, झरना और वाटरशेड की सुरक्षा, स्थायी पर्यटन और आजीविका के लिए समर्थन जैसी लंबी अवधि की लचीलापन और सुरक्षा योजना के लिए होना चाहिए।
पहाड़ों के लिए समय की मांग
संगठनों ने केंद्र से आपदा तैयारी और जोखिम घटाना, गांव-स्तरीय आपदा तैयारी योजनाएँ, पंचायतों, महिला समूहों, युवाओं और स्थानीय संस्थाओं के लिए प्रशिक्षण, बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन की चेतावनी प्रणाली, आपदा प्रतिक्रिया और राहत, भोजन, दवाइयाँ, ईंधन और आवश्यक सामग्री का पूर्व-संग्रह, अस्थायी आश्रय, सौर ऊर्जा आधारित आपात प्रणाली, संचार उपकरण पर विशेष ध्यान देने पर ध्यान आकर्षित किया है।
सामाजिक संगठनों ने केंद्र से कहा है कि मनोवैज्ञानिक और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, आपदा पीड़ितों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श सेवाएँ, बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और विकलांगों भूमि पुनर्वास और जलवायु-प्रेरित विस्थापन, क्लाइमेट रिफ्यूजी के लिए कानूनी पहचान और पुनर्वास, उच्च जोखिम वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास, सामाजिक सहमति के साथ आजीविका और आवास सहायता समय की मांग है।
पर्यावरण-संवेदनशील बुनियादी ढांचा, स्थानीय सामग्री और कम प्रभाव वाली तकनीक, भूस्खलन और आपदा-प्रवण इलाकों में भविष्य की संरचनाओं से बचाव, सुरक्षित स्थल, राहत सामग्री, उपकरण और आपातकालीन उपकरणों के लिए सुरक्षित केंद्र, निकासी मार्ग और आपात पहुंच सुदृढ़ करना, एनजीओ की भूमिका, विशेषज्ञ वैज्ञानिकों, नागरिक संगठनों और संस्थाओं का आधिकारिक रूप से प्रशिक्षण, जागरूकता, राहत वितरण और सामाजिक निगरानी में उनका योगदान उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को यह पत्र को गुमान सिंह हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह और हिमालय बचाओ समिति के संयोजक कुलभूषण उपमन्यु ने लिखा है, जिसे 15 प्रमुख नागरिक संगठनों ने समर्थन दिया है, जिनमें संदेश स्पष्ट है कि हिमालय की सुरक्षा में निवेश करना भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवन की सुरक्षा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण पहाड़ की कितनी चिंता करता है, यह अब उसके पाले में है।
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Jyoti maurya

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