जीन फ्रेंकोस अलार्ड : फारसी में शायरी करने वाला पंजाब का फ्रेंच जनरल, चंबा राजघराने का दामाद
जीन फ्रेंकोस अलार्ड : फारसी में शायरी करने वाला पंजाब का फ्रेंच जनरल, चंबा राजघराने का दामाद
बिजनेस हिमाचल। धर्मशाला
जीन फ्रेंकोस अलार्ड (1785-1839), की ज़िंदगी पेरिस से लेकर लाहौर-पेशावर तक और महाराजा रणजीत सिंह के दरबार से फ्रांसीसी लीजन ऑफ ऑनर तक फैली हुई है। अलार्ड ने नपोलियन की सेना में कैप्टन के रूप में सेवा दी। वॉटरलू की हार के बाद 1822 में पंजाब आए। उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह सिंह की सेना में यूरोपीय सैन्य मॉडल लागू करने का काम संभाला।
रणजीत सिंह के साथ विशेष रिश्ता
1029 में प्रकाशित सी ग्रे की किताब European Adventurers of Northern India, 1785 1849 (C. Grey, 1929) में अलार्ड और महाराजा के बीच रिश्ते को भाइयों से भी नजदीकी बताया गया है।
महाराजा ने इस फ्रांसीसी जनरल को न सिर्फ़ सैनिक कमांड सौंपी, बल्कि सम्मान स्वरूप स्थानीय राजघरानों से विवाह करने के लिए ‘औपचारिक वराह’ भी दिया।
अलार्ड ने पंजाब की सेना में यूरोपीय क़वायदें लागू कीं। ड्रेगूनों और लाँसरों की यूनिट बनाई और फ्रेंच स्टाइल में कमांड दी। उनकी मेहनत ने पंजाब की खालसा सेना को उस समय के भारत में एक प्रतिष्ठित बल बना दिया। अलार्ड को फ्रांस के ‘लीगन ऑफ ऑनर’ सम्मानित किया गया, वहीं पंजाब में उन्हें ‘ओस्पीसियस स्टार ऑफ पंजाब’ से सम्मानित किया। मौत के बाद उन्हें लाहौर के कुरी बाग़ में दफनाया गया।
फारसी सीखी, कविता लिखी
कठोर यूरोपीय सैनिक की छवि वाली पीढ़ी में अलार्ड अलग थे। उन्होंने फारसी भाषा सीखी, कविता लिखी, स्थानीय संस्कृति को समझा। समझ और समर्पण उनकी पहचान थी। अलार्ड की कहानी सिर्फ़ एक विदेशी जनरल की नहीं।
यह सांस्कृतिक मिलन, सैन्य सुधार और मानवता का संदेश है। इतिहास की धूल-भरी पन्नों से उभरकर हमें याद दिलाती है कि साहस और समझ साथ चलते हैं और एक विदेशी भी भारत का वीर बन सकता है।
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