कांगड़ा किला: कब्जे के लिए सियासी चालाकियों की कई कहानियां सुनाता भारत का सबसे पुराना किला

कांगड़ा किला: कब्जे के लिए सियासी चालाकियों की कई कहानियां सुनाता भारत का सबसे पुराना किला
कांगड़ा किला: कब्जे के लिए सियासी चालाकियों की कई कहानियां सुनाता भारत का सबसे पुराना किला
हिमाचल बिजनेस स्पेशल। कांगड़ा
कांगड़ा के किले पर कई आक्रमणकारियों ने कब्जा करने की कोशिश की। 1009 में महमूद गजनवी ने इस किले पर आक्रमण किया और खजाने लूटे। 1360 में फिरोज शाह तुगलक ने इस पर हमला किया और फिर शेर शाह सूरी ने 1540 में इसे जीतने का प्रयास किया। अकबर ने 1556 में राजा धर्म चंद को अधीनता स्वीकारने पर मजबूर किया।
160 साल मुगलों का कब्जा
1620 में जहांगीर ने कांगड़ा के राजा राजा हरि चंद को मारकर कांगड़ा राज्य को मुगल साम्राज्य में मिला लिया। 160 से अधिक वर्षों तक कांगड़ा किला मुगल शासन के तहत रहा। नवाब अली खान और बाद में उनके पुत्र सैफ अली खान जैसे मुगल गवर्नर भारत के सबसे प्राचीन और भव्य किलों में शुमार कांगड़ा किले में तैनात रहे।
पैतृक किले के लिए मदद की गुहार
18वीं सदी के अंत में, जैसे-जैसे मुगल साम्राज्य का पतन होने लगा, कटोच वंश के वंशज राजा संसार चंद ने अपने पैतृक किले को वापस पाने की ठानी। संसार चंद ने कन्हैया मिस्ल के प्रमुख जयसिंह कन्हैया से मदद मांगी, जिन्होंने अपने पुत्र गुरबख्श सिंह और बघेल सिंह के नेतृत्व में एक बड़ी सेना संसार चंद की मदद के लिए कांगड़ा भेजी।
किले को छुड़वाने के लिए रिश्वत
किले के मुगल गवर्नर सैफ अली खान का घेराबंदी के दौरान ही 1783 में उनका देहांत हो गया। उनके पुत्र जीवन खान ने किले की कमान संभाली। संसार चंद ने किले के भीतर तैनात मुगल तोपचियों से गुप्त वार्ता कर बड़ी रकम का लालच दिया, लेकिन गुरबख्श सिंह कन्हैया ने चतुर चाल चलकर जीवन खान को भारी रिश्वत देकर आत्मसमर्पण करने के लिए राजी कर लिया।
संसार चंद के हाथ से फैसला किला
संसार चंद की सेना सैफ अली खान के पार्थिव शरीर को किले से बाहर ले जाने के अवसर का इंतजार कर रही थी, सिख सेना पहले ही भीतर घुस चुकी थी। अंदर से तुरंत किले के द्वार बंद कर दिए, जिससे संसार चंद की सेना बाहर ही रह गई। इस प्रकार, गुरबख्श सिंह कन्हैया ने बड़ी ही चालाकी से कांगड़ा का किला जीत लिया और चार वर्षों तक कांगड़ा किले पर अधिकार बनाए रखा।
गोरखाओं से छुड़ा कर सिखों को सौंपा किला
गुरबख्श सिंह की मृत्यु के बाद, कांगड़ा का किला कई हाथों से गुजरा। 1786 में जय सिंह कन्हैया को संसार चंद के साथ शांति संधि करनी पड़ी और किला उन्हें सौंपना पड़ा। 1805-1806 में गोरखाओं ने अमर सिंह थापा के नेतृत्व में आक्रमण कर किले पर कब्जा कर लिया। 1809 में संसार चंद ने गोरखाओं से बचने के लिए महाराजा रणजीत सिंह की मदद ली और किला उन्हें सौंप दिया।
सिखों के बाद अंग्रेजों का कब्जा
सिखों के बाद कांगड़ा किला अंग्रेजों के कब्जे में रहा। 1846 में प्रथम एंग्ल-सिख युद्ध के बाद अंग्रेजों ने कांगड़ा किले पर कब्जा कर लिया। 4 अप्रैल 1905 के कांगड़ा के विनाशकारी भूकंप में किला बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद अंग्रेजों ने इसे सैन्य चौकी के रूप में त्याग दिया। आज कांगड़ा का किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/amazing-story-twelve-pethas-your-donor-bhoshal-raje-sir-does-not-know/

Jyoti maurya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *