कसौली में चिकित्सा के पारंपरिक ढांचे को चुनौती देने वाले ब्रिटिश डॉक्टर मेजर ऑस्टिन, लंदन लौट कर की नेचरोथरैपी की शुरुआत
कसौली में चिकित्सा के पारंपरिक ढांचे को चुनौती देने वाले ब्रिटिश डॉक्टर मेजर ऑस्टिन, लंदन लौट कर की नेचरोथरैपी की शुरुआत
अजय शर्मा। कसौली
ब्रिटिश काल में कसौली स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य चिकित्सा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। कसौली में वर्ष 1912 के आसपास एक ब्रिटिश सैन्य चिकित्सक मेजर रेजिनाल्ड फ्रांसिस एडवर्ड ऑस्टिन ने सेवाएँ दीं। वे भारतीय चिकित्सा सेवा से जुड़े थे और 1912 में कसौली में सिविल सर्जन के रूप में कार्यरत रहे। इससे पहले वे लाहौर डिवीजन में लैरिंजोलॉजी (गला रोग विशेषज्ञ) के रूप में नियुक्त थे।
कसौली उस समय सैन्य और नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र था, जहाँ ब्रिटिश अधिकारियों और सैनिकों का उपचार किया जाता था। 1922 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘Direct Paths to Health’ उस दौर में काफी चर्चित पुस्तक रही। उन्होंने अपेंडिक्स ऑपरेशन और रक्त ट्रान्स्फ्यूजन की आलोचना जैसे चिकित्सा जगत में कई विवाद खड़े किए।
लंदन लौट कर नेचरोथरैपी की वकालत
ऑस्टिन का जीवन केवल पारंपरिक चिकित्सा तक सीमित नहीं रहा। 1920 के दशक में लंदन लौटकर उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा (नेचरोथरैपी) को बढ़ावा देना शुरू किया। उन्होंने दवाओं और टीकाकरण का कडा विरोध किया तथा आहार, उपवास, श्वास अभ्यास और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों का समर्थन करना शुरू कर दिया।
उनके शुरू किए विवादों से चिकित्सा जगत में खूब हंगामा बरपना शुरू हो गया। ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन ने उनके कई विचारों पर आपत्ति जताई। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए जनरल मेडिकल काउंसिल के सामने भी पेश होना पड़ा। बाद में उन्होंने माफी माँग ली और उनका नाम मेडिकल रजिस्टर से नहीं हटाया गया।
चर्चित किताबों के लेखक
कसौली स्वच्छ हवा और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। ब्रिटिश राज में यह स्थान चिकित्सा और सैन्य गतिविधियों का केंद्र था। मेजर ऑस्टिन जैसा व्यक्तित्व कसौली के सैन्य इतिहास के कम चर्चित लेकिन रोचक अध्याय हैं। उनकी जीवन यात्रा बताती है कि कसौली की वादियाँ केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि विचारों और बहसों का भी इतिहास समेटे हुए हैं।
डॉक्टर ऑस्टिन ने कई चरचाइट किताबें लिखीं। 1922 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘डायरेक्ट पाठ टू हेल्थ’ ने खूब चर्चा बटोरी। इसके अलावा 1918 में ‘नेचुरल पेनलेस चाइल बर्थ’, 1918 में ही ‘सम न्यू प्रिंसिपल्स इन न्यूट्रीशन’, साल 1925 में ’द स्ट्रेट स्पाइन’ का प्रकाशन हुआ। मेजर ऑस्टिन एक ऐसे चिकित्सक थे जिन्होंने चिकित्सा के पारंपरिक ढाँचे को चुनौती दी।
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