सात समंदर पार तक फेमस थे मनाली के मंकी बाबा, दुनिया भर हिप्पी थे बाबा के कायल
सात समंदर पार तक फेमस थे मनाली के मंकी बाबा, दुनिया भर हिप्पी थे बाबा के कायल
विनोद भावुक | मनाली
कहते हैं, कुछ तस्वीरें सिर्फ़ दृश्य नहीं, बल्कि समय का दरवाज़ा होती हैं। ऐसा ही हुआ जब ऑस्ट्रेलिया की जॉन क्वीन ने फेसबुक पेज ‘60s, 70s और 80s Trails to India’ पर मनाली के मंकी बाबा की तस्वीरें साझा कीं।
जैसे ही ये तस्वीरें पोस्ट हुईं, दुनिया भर के लोग 80 के दशक की मनाली की गलियों में लौट गए। उस दौर में जब हिमालय की गोद में बसे इस छोटे से कस्बे में हर रंग, हर संस्कृति, हर विचार अपनी जगह खोज रहा था।
कौन थे ‘मंकी बाबा’?
मनाली के पुराने लोग बताते हैं कि मंकी बाबा एक बेहद मस्तमौला साधु थे। वे अक्सर विदेशी यात्रियों, हिप्पियों और संगीतकारों के बीच नज़र आते थे। उनके साथ हमेशा एक छोटा बंदर रहता था। शायद यही वजह थी कि विदेशी उन्हें प्यार से ‘Monkey Baba’ कहकर बुलाते थे।
बाबा के असली नाम के बारे में आज भी किसी को पक्की जानकारी नहीं है, पर उनकी मुस्कान, सादगी और आज़ाद जीवनशैली को देखने वाले आज भी उन्हें याद करते हैं और बाबा के जुड़े कई संस्मरण सुनाते हैं।
जॉन क्वीन की यादें, हिमांशु शर्मा की टिप्पणी
ऑस्ट्रेलिया की जॉन क्वीन ने बताया कि उन्होंने साल 1986 में मंकी बाबा के फोटो खींचे थे। उन्होंने लिखा कि वो हमेशा हँसते रहते थे, लोगों से बातें करते और उनका बंदर हर किसी का ध्यान खींच लेता था। मनाली तब जादू से भरा था।
हिमालय की बर्फ़, पर्यावरण और उपभोक्ता अधिकारों के प्रहरी हिमांशु शर्मा, जो आज हिमालयन स्नोकैट के सीओओ हैं और ‘60s, 70s & 80s Trails to India’ से जुड़े हैं, उन्होंने लिखा कि मंकी बाबा हमें हमेशा मुस्कुराकर चॉकलेट देते थे। उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि वो हमारे बचपन की याद बन जाएंगे।
पर्यटन स्थल नहीं, संस्कृतियों का संगम था मनाली
यह कहानी सिर्फ़ एक बाबा या एक फोटो की नहीं है, बल्कि एक युग की निशानी है, जब मनाली सिर्फ़ पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि संस्कृतियों का संगम था। आज डिजिटल युग में ये तस्वीरें हमें याद दिलाती हैं कि भारत ने कितनी आत्मीयता से दुनिया को अपनाया था।
मनाली के मंकी बाबा अब भले ही इतिहास के पन्नों में हों, पर उनकी मुस्कुराहट और वो छोटा बंदर अब भी कई दिलों में ज़िंदा हैं। अगर आपकी भी कभी मंकी बाबा से मुलाक़ात हुई है तो कमेन्ट में अपने संस्मरण लिखना।
डिजिटल परिवार से जुड़ी दुनिया
‘60s, 70s और 80s Trails to India एक सांस्कृतिक यात्रा फेसबुक पेज है, जो उन लोगों का डिजिटल परिवार बन चुका है जो उस दौर में भारत की आत्मा को छूने आए थे। यह वही रास्ता है जिसे हिप्पी ट्रेल कहा जाता है।
यूरोप से होते हुए अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और फिर मनाली, गोवा, ऋषिकेश, वाराणसी तक पहुँचने वाली यात्रा, जिनमें दुनिया भर के युवा शामिल होते थे और अंदर के सुकून की तलाश उन्हें लंबी यात्रा पर ले आती थी।
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