पद्मश्री पिता–पुत्र की जोड़ी : पिता ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गोली लगने के बाद अंतिम क्षणों में किया उपचार, बेटे ने संभाला प्रधानमंत्री अटल निजी चिकित्सक का दारोमदार, सेवा, संस्कार और सम्मान की विरासत की असाधारण कहानी
पद्मश्री पिता–पुत्र की जोड़ी : पिता ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गोली लगने के बाद अंतिम क्षणों में किया उपचार, बेटे ने संभाला प्रधानमंत्री अटल निजी चिकित्सक का दारोमदार, सेवा, संस्कार और सम्मान की विरासत की असाधारण कहानी
विनोद भावुक। धर्मशाला
भारतीय चिकित्सा इतिहास में कुछ नाम केवल डॉक्टर नहीं होते, वे संस्थान बन जाते हैं। ऐसी ही एक विरासत है डॉ. जगदेव सिंह गुलेरिया और उनके पुत्र डॉ. रणदीप गुलेरिया। कांगड़ा के पिता–पुत्र, दोनों एम्स दिल्ली से जुड़े, दोनों पद्मश्री से सम्मानित, और दोनों ने भारत की स्वास्थ्य सेवा को नई दिशा दी। विशेष बात यह है कि डॉ. रणदीप गुलेरिया के छोटे भाई डॉ. संदीप गुलेरिया भी पद्मश्री से सम्मानित हैं।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गोली लगने के बाद डॉ. जगदेव सिंह गुलेरिया ने अंतिम क्षणों तक चिकित्सा प्रयास किए थे और जेपी आंदोलन के दौरान जेल में बंद जयप्रकाश नारायण की चिकित्सीय जांच की थी। डॉ. रणदीप गुलेरिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निजी चिकित्सक रहे थे। यह सिर्फ़ पिता–पुत्र को जोड़ी नहीं, बल्कि भारतीय चिकित्सा इतिहास की दो पीढ़ियाँ हैं।
पिता : नैतिकता और चिकित्सा
1927–28 के आसपास तत्कालीन ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के मंजारा गांव में जन्मे डॉ. जगदेव सिंह गुलेरिया उस पीढ़ी के चिकित्सक थे, जिनके लिए डॉक्टरी एक पेशा नहीं, सेवा थी। पंजाब विश्वविद्यालय से 1953 में एमबीबीएस, 1957 में एमडी और एम्स दिल्ली से 1962 में कार्डियोलोजी में डीएम की।
एम्स दिल्ली में प्रोफेसर, डीन, कार्डियोलॉजिस्ट, जनरल फिज़ीशियन के तौर पर दक्ष चिकित्सक
अक्टूबर 1984 की वह ऐतिहासिक और दुखद घड़ी, जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गोली लगने के बाद एम्स लाया गया। डॉ. जगदेव सिंह गुलेरिया ड्यूटी पर मौजूद थे। उन्होंने अंतिम क्षणों तक चिकित्सा प्रयास किए। यह भारतीय इतिहास का मूक, लेकिन महत्त्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने जेपी आंदोलन के दौरान जेल में बंद जयप्रकाश नारायण की चिकित्सीय जांच की।
डॉ. जगदेव सिंह गुलेरिया ने एम्स की एथिक्स कमेटी का नेतृत्व किया, संस्थागत अनियमितताओं पर निष्पक्ष जांच की डब्ल्यूएचओ की हेल्थ फॉर आल की पहल से जुड़े और देश–विदेश में प्रतिष्ठित व्याख्यान दिए। 2003 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और 2014 में एम्स ने उन्हें लाइफ टाइम एचिवमेंट अवार्ड दिया। 22 जनवरी 2026 को 98 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
बेटा : भारत की आधुनिक चिकित्सा का चेहरा
जहां पिता ने नींव रखी, वहीं पुत्र डॉ. रणदीप गुलेरिया ने उस विरासत को 21वीं सदी की चुनौतियों से जोड़ा। 5 अप्रैल 1959 को पैदा हुये रणदीप गुलेरिया ने आईजीएमसी शिमला से एमबीबीएस और पीजीएमईआर चंडीगढ़ से एमडी और डीएम कर एम्स दिल्ली में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष और फिर 2017–2022 तक एम्स दिल्ली के निदेशक रहे।
वे भारत में पलमनरी मेडिसिन और स्लीप डिसॉर्डर के पहले केंद्र की स्थापना से जुड़े, डब्ल्यूएचओ की सेज समिति के सदस्य रहे और आईएईए (वियना) के सलाहकार बने। वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निजी चिकित्सक भी रहे। कोविड काल में जब देश भय, भ्रम और अफवाहों से जूझ रहा था, वे वैज्ञानिक तर्क, संतुलित भाषा, और मानवीय संवेदना के साथ भारत की सबसे भरोसेमंद आवाज़ बने।
उनकी पुस्तक “Till We Win: India’s Fight Against COVID-19” महामारी काल का प्रामाणिक दस्तावेज़ मानी जाती है। साल 2015 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इससे पहले 2014 में डॉ. बी.सी. रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। वे कई राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संस्थाओं के फेलो रहे।
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