‘पर्ल ऑफ़ इंडिया: ब्रिटिश राज की समर कैपिटल में भारतीय नज़ाकत की चमक प्रिंसेस सीता देवी

‘पर्ल ऑफ़ इंडिया: ब्रिटिश राज की समर कैपिटल में भारतीय नज़ाकत की चमक प्रिंसेस सीता देवी
‘पर्ल ऑफ़ इंडिया: ब्रिटिश राज की समर कैपिटल में भारतीय नज़ाकत की चमक प्रिंसेस सीता देवी
विनोद भावुक। शिमला
ब्रिटिश राज के दौर का शिमला केवल सत्ता की ग्रीष्मकालीन राजधानी नहीं था। यह वह मंच भी था, जहां हुकूमत, हैसियत और हाई फ़ैशन का प्रदर्शन होता था। वायसराय हाउस से लेकर निजी बॉलरूम पार्टियों तक, शिमला की शामें रॉयल और रिचुअल से भरी होती थीं। इन्हीं शाही महफ़िलों में कपूरथला की प्रिंसेस सीता देवी की मौजूदगी यूरोपीय ठाठ को भी पीछे छोड़ देती थी। दुनिया ‘पर्ल ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन प्रिंसेंस ऑफ स्टाइल‘ कहती थी।
1930-40 के दशक में, जब ब्रिटिश अधिकारी और यूरोपीय मेहमान शिमला में गर्मियां बिताने आते थे, तब प्रिंसेस सीता देवी शाही पार्टियों की जान होती थीं। उनकी साड़ी की ड्रेपिंग, फर कोट, गहनों का संयमित वैभव और सबसे बढ़कर उनका आत्मविश्वास साबित करता था कि भारतीय स्त्री केवल परंपरा की प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक शैली की अग्रदूत भी है। एक राजघराने की बहू भारतीय पहचान का जीवंत प्रतीक बनकर उभरीं।
शिमला से लंदन और पेरिस तक
प्रिंसेस सीता देवी का आकर्षण शिमला तक सीमित नहीं रहा। लंदन और पेरिस में उनकी मौजूदगी ने फैशन की दुनिया में हलचल मचा दी। ‘डेहली मेल’ ने 1934 में उन्हें ‘रोज ऑफ इंडिया’ कहा तो Vogue पत्रिका ने उन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में शामिल किया। फोटोग्राफ़र सीसल बीटन और मैन रे के लिए वे म्यूज़ (प्रेरक) बनीं।
डिज़ाइनर मेन बोचर और एलसा स्कीर्परेली भी उनसे प्रेरित हुए।
प्रिंसेस सीता देवी की लंदन और पेरिस तक के सफर की नींव शिमला में पड़ी, जहां ब्रिटिश सत्ता के बीच एक भारतीय महिला ने अपने स्टाइल से औपनिवेशिक सोच को चुनौती दी। ब्रिटिश राज में भारतीय महिलाओं को अक्सर सीमित और पारंपरिक नज़रिये से देखा जाता था। ऐसे समय में, शिमला जैसे सत्ता-केंद्र में प्रिंसेस सीता देवी का ग्लोबल स्टाइल आइकन बनना बिना नारे, बिना भाषण, सिर्फ़ आत्मविश्वास के साथ, एक तरह का मौन प्रतिरोध था।
‘केसर-ए हिन्द’ का सम्मान
प्रिंसेस सीता देवी ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों के लिए फंड जुटाने के महत्वपूर्ण काम किया।
उन्हें 1944 में ‘केसर- ए – हिन्द’ से सम्मानित किया गया। 2002 में उनके निधन के साथ एक युग समाप्त हुआ,
लेकिन भारतीय स्त्री के वैश्विक आत्मविश्वास के रूप में उनकी विरासत आज भी जीवित है। 2006 में प्रकाशित अमीन जाफ़र की पुस्तक ‘मेड फॉर महाराजज’ प्रिंसेस सीता देवी के जीवन में गहरे उतरने का मौका देती है।
आज शिमला की सड़कों पर चलते हुए शायद उनका नाम किसी बोर्ड पर न दिखे, लेकिन इतिहास के आईने में
ब्रिटिश राज का शिमला प्रिंसेस सीता देवी की शान और स्टाइल के बिना अधूरी लगता है। शिमला की यादों में आज भी उनके हुनर की एक चमक जिंदा है। यह प्रेरक कहानी पसंद आई हो तो पोस्ट को लाइक और शेयर कर हमारा सहयोग करें।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/the-english-army-officer-famous-as-the-founder-of-shimla-whose-house-known-as-kennedy-house-holds-the-record-of-being-the-first-european-residence-in-shimla/

Jyoti maurya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *