पिलर बॉक्स : शिमला की गलियों में ब्रिटिश इतिहास की एक अनकही दास्तान, पोस्ट सर्विस की लाल पहचान
पिलर बॉक्स : शिमला की गलियों में ब्रिटिश इतिहास की एक अनकही दास्तान, पोस्ट सर्विस की लाल पहचान
विनोद भावुक ।शिमला
भारत में डाक सेवा का इतिहास जितना प्रशासनिक है, उतना ही सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है। पहाड़ों की रानी शिमला में आज भी कई ऐसे अवशेष मौजूद हैं, जो शिमला शहर को ब्रिटिश भारत की स्मृतियों से जोड़ते हैं। इनमें पिलर बॉक्स ब्रिटिश-युग का सबसे रोचक और ऐतिहासिक प्रतीक है, जिसे हम सामान्य भाषा में लाल डाक पिटारी कहते हैं।
पिलर बॉक्स असल में एक फ्री-स्टैंडिंग पोस्ट बॉक्स है, जहां आम लोग अपना भेजा जाने वाला पत्र डालते हैं। यह बॉक्स ब्रिटेन और ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहे भारत, साइप्रस, हांगकांग और न्यूज़ीलैंड में लगाये गए थे। यह पोस्ट बॉक्स 1852 से उपयोग में है, यानी पहले डाक स्टैम्प के मात्र 12 साल बाद ही दुनिया भर में डाक सेवा के प्रतीक के रूप में स्थापित होने शुरू हुए।
शिमला में पिलर बॉक्स: इतिहास की लाल निशानी
शिमला में आज भी ब्रिटिश-युग के पिलर बॉक्स के उदाहरण मौजूद हैं। 1856 में बने पिलर बॉक्स का अवशेष अब शिमला के संग्रहालय परिसर में संरक्षित है, जो उस समय की साम्राज्यात्मक व्यवस्थाओं और डाक सेवा के विस्तार की याद दिलाता है। इसे Suttie & Co, Greenock (Scotland) ने बनाया था। ब्रिटिश प्रशासन ने पिलर बॉक्स को इसलिए लगाया ताकि आम लोग अपने पत्र बिना पोस्ट ऑफिस जाए आसानी से डाल सकें।
उन दिनों जब ट्रेन, संचार और दूरसंचार इतने विकसित नहीं थे, इससे जनता द्वारा संवाद की आज़ादी को एक नया रूप मिला। यह लाल पोस्ट बॉक्स अब सांस्कृतिक प्रतीक के तौर पर भी प्रसिद्ध हैं। औपनिवेशिक काल में शिमला भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। पिलर बॉक्स यहां बसने वाले अधिकारियों, सैनिकों, व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच पत्राचार को सरल बनाते थे।
विरासत की लाल छाप
इन पिलर बॉक्स को देख कर हम यह महसूस कर सकते हैं कि संचार, भरोसा और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक रहा है। खासकर उन दिनों जब लिखे गए शब्दों से ही दिलों और घरों के बीच संदेश पहुंचते थे। हालांकि अधिकांश पिलर बॉक्स आधुनिकता के साथ हट गए हैं या बदल दिए गए हैं, शिमला में मौजूद पुराने उदाहरण आज भी इतिहास प्रेमियों, संग्रहकारों और पर्यटन मार्गदर्शकों के लिए आकर्षण हैं।
ये लाल पिलर बॉक्स हमें सिर्फ डाक सेवा की कहानी ही नहीं सुनाते हैं, बल्कि शिमला के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास की दास्तान भी सुनाते हैं। एक ऐसा इतिहास जो लोगों को जोड़ता, भावनाओं को आगे बढ़ाता और पहाड़ों की हवाओं में गूंजता रहता है। आप भी अगली बार शिमला आयें तो ब्रिटिश शिमला के इस सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास को देखना न भूलें
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/a-unique-example-of-medical-service-in-the-hills-of-shimla-dr-jamini-sen-dedicated-her-life-to-womens-health/
