मंडी के खत्री समाज के पहले इतिहासकार पिनक पानी धौन, खत्री समाज के इतिहास को पहली बार शब्दों में दर्ज करने का किया साहस
मंडी के खत्री समाज के पहले इतिहासकार पिनक पानी धौन, खत्री समाज के इतिहास को पहली बार शब्दों में दर्ज करने का किया साहस
विनोद भावुक। मंडी
हिमाचल प्रदेश की सामाजिक–सांस्कृतिक विरासत में कई ऐसी शख़्सियतें हैं, जिनका योगदान किताबों की अलमारियों में सिमटकर रह गया, लेकिन जिनके बिना इतिहास अधूरा है। पिनक पानी धौन ऐसी ही एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण शख़्सियत थे, जिन्होंने मंडी के खत्री समाज के इतिहास को पहली बार शब्दों में दर्ज करने का साहस किया।
मौखिक परंपरा का लिख कर संरक्षण
एक समय था जब खत्री समाज का इतिहास पीढ़ी दर पीढ़ी सिर्फ़ किस्सों और स्मृतियों के सहारे जीवित था। पिनक पानी धौन ने इस मौखिक इतिहास को लिखित रूप देकर उसे स्थायित्व दिया। उनकी पुस्तक न केवल सामाजिक दस्तावेज़ है, बल्कि मंडी रियासत के सामाजिक गठन को समझने की कुंजी भी है।
यह पुस्तक बेहद दुर्लभ मानी जाती है।
सार्वजनिक पुस्तकालयों, निजी संग्रहों और समाज की पुरानी अलमारियों में इसके कुछ ही संस्करण बचे हैं। इतिहासकारों और शोधार्थियों के लिए यह पुस्तक वरदान है। यह पुस्तक मंडी रियासत के खत्री समाज की उत्पत्ति, मंडी में उनकी भूमिका और मंडी रियासत में सामाजिक संगठन और परंपराएँ जैसे विषयों पर प्राथमिक स्रोत है।
इतिहास लिखने का साहस
पिनक पानी धौन न तो किसी विश्वविद्यालय से जुड़े इतिहासकार थे, न ही किसी औपनिवेशिक संस्था से। फिर भी उन्होंने समाज के भीतर से इतिहास को देखने और लिखने का काम किया। यही कारण है कि उनकी लेखनी में औपनिवेशिक दृष्टि नहीं, बल्कि समाज की आत्मकथा झलकती है।
आज जब खत्री समुदाय अपनी पहचान और जड़ों की तलाश में हैं, पिनक पानी धौन की यह पुस्तक हमें याद दिलाती है कि जो समाज अपना इतिहास खुद नहीं लिखता, उसका इतिहास कोई और लिख देता है। इस दृष्टि से पिनक पानी धौन सिर्फ़ लेखक नहीं, बल्कि मंडी के खत्री समाज के पहले इतिहासकार कहे जा सकते हैं।
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