शाही जीवन को ‘सुनहरा पिंजरा’ कहने वाली कपूरथला की क्राउन प्रिंसेस ब्रिंदा, जुब्बल की राजकुमारी ने शिमला में ली थी आखिरी सांस
शाही जीवन को ‘सुनहरा पिंजरा’ कहने वाली कपूरथला की क्राउन प्रिंसेस ब्रिंदा, जुब्बल की राजकुमारी ने शिमला में ली थी आखिरी सांस
विनोद भावुक। शिमला
ब्रिटिश भारत के शाही दौर में बहुत-सी रानियां और राजकुमारियां ऐश्वर्य की प्रतीक रहीं, लेकिन कपूरथला की क्राउन प्रिंसेस ब्रिंदा देवी उन विरल महिलाओं में थीं, जिन्होंने शाही वैभव के भीतर छिपी बेड़ियों को शब्द दिए। उनका जीवन शानो-शौकत, सामाजिक प्रतिष्ठा, संघर्ष और आत्म-अभिव्यक्ति का अनोखा संगम था। वे भारतीय इतिहास की उन शाही महिलाओं में थीं, जिन्होंने खामोशी तोड़ी और कलम उठाई।
ब्रिंदा देवी एक लेखिका और विचारशील स्त्री भी थीं। 1954 में एलेन विलियम्स ने उनकी आत्मकथा ‘Maharani: Memoirs of a Rebellious Princess’ लिखी। यह पुस्तक उनके जीवन की सबसे बड़ी पहचान बनी। आत्मकथा में उन्होंने शाही जीवन को ‘सुनहरा पिंजरा’ कहते हुए स्त्रियों की सीमित स्वतंत्रता, मानसिक संघर्ष और सामाजिक दबावों को खुलकर सामने रखा।
जुब्बल की प्रिंसेस, कपूरथला की क्राउन प्रिंसेस
ब्रिंदा देवी का जन्म 11 जनवरी 1890 जुब्बल रियासत में हुआ था। वे जुब्बल के राजकुमार गंभीर चंद की पुत्री तथा देवी कौर की संतान थीं। पहाड़ी रियासत की यह राजकुमारी आगे चलकर पंजाब की प्रतिष्ठित रियासत कपूरथला की क्राउन प्रिंसेस बनीं। वर्ष 1911 में उनका विवाह महाराजा जगतजीत सिंह प्रथम के ज्येष्ठ पुत्र और कपूरथला के क्राउन प्रिंस परमजीत सिंह से हुआ।
विवाह के बाद वे कपूरथला की क्राउन प्रिंसेस ब्रिंदा देवी कहलाईं। वे तीन पुत्रियों प्रिंसेस इंदिरा देवी, प्रिंसेस सुशीला देवी और प्रिंसेस उर्मिला देवी की मां बनीं। उनकी सास महारानी सीता देवी अपने समय की विश्वप्रसिद्ध फैशन आइकन थीं, जिससे कपूरथला की महिलाओं की पहचान वैश्विक मंच पर बनी।
उनका जीवन केवल राजनीतिक या शाही नहीं रहा, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय सामाजिक हलकों तक पहुंचा।
शिमला में ली आखिरी सांस
ब्रिंदा देवी आत्मकथा गवाही देती है कि राजसी जीवन केवल ताज और ठाठ नहीं होता, बल्कि उसमें भी संघर्ष होता है, आत्म-संघर्ष होता है और कभी-कभी विद्रोह भी। उनकी आत्मकथा द न्यूयॉर्क टाइम्स में छपने के चलते चर्चित हुई और भारतीय राजघरानों की स्त्रियों की वास्तविक स्थिति को दुनिया के सामने लाने वाला दस्तावेज़ बनी।
ब्रिंदा देवी की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रसिद्ध संगीतकार कोल पोर्टर ने उनके लिए गीत लिखा। यह किसी भारतीय राजकुमारी के लिए पश्चिमी सांस्कृतिक इतिहास में एक असाधारण सम्मान था। मई 1962 वुडविला पैलेस, शिमला में उनका निधन हुआ। शिमला उनके जीवन की अंतिम यादों का साक्षी बना।
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