जम्मू-कश्मीर के लिए ‘शुभ’ रहीं सीबा की राजकुमारी, ‘सिबेई महारानी’ को मिला राजमाता बनने का गौरव
जम्मू-कश्मीर के लिए ‘शुभ’ रहीं सीबा की राजकुमारी, ‘सिबेई महारानी’ को मिला राजमाता बनने का गौरव
विनोद भावुक। धर्मशाला
रियासत्कालीन अनसुनी कनाहियों के सफर में आज प्रसंग सीबा रियासत की उस राजकुमारी का, जो जम्मू-कश्मीर रियासत के लिए ‘शुभ’ रहीं। जिन्हें राज दरबार में राजमाता के गौरव मिला और इतिहास जिन्हें ‘सिबेई महारानी’ या फिर ‘मल्होरी रानी’ के नाम से याद रखे है। जून 1843 में जम्मू- कश्मीर के महाराजा रणबीर सिंह का विवाह सीबा रियासत की राजकुमारी शुभ देवी से हुआ।
विवाह के बाद राज कुमारी को स्नेहपूर्वक ‘सिबेई महारानी’ अथवा ‘मल्होरी रानी’ के नाम से संबोधित किया गया, जिसने उनके मायके की स्मृति को सदैव जीवंत रखा। महारानी सुभ देवी साहिबा ने जून 1861 में राजकुमार राजा राम सिंह को जन्म देकर डोगरा राजवंश की उत्तराधिकार परंपरा को सुदृढ़ किया। यह उस दौर में किसी भी महारानी के लिए परम राजकीय कर्तव्य माना जाता था।
राजकुल की शालीनता, संयम और कूटनीति
‘सिबेई महारानी’ या फिर ‘मल्होरी रानी’ के बचपन को लेकर कोई ज्यादा विवरण नहीं मिलता। इतना कहा जाता है कि सीबा रियासत में 19वीं शताब्दी में एक तेजस्वी राजकुमारी शुभ देवी को जन्म दिया, जिसके विवाह ने दो पर्वतीय राजसत्ताओं को एक सांस्कृतिक सेतु में बांध दिया। सुभ देवी साहिबा, सिबा के राजा बिजे (विजय) सिंह की पुत्री थीं।
इंपीरियल गज़ट ऑफ इंडिया (पंजाब हिल स्टेट्स एंड जम्मू एंट्रीज़) के मुताबिक सीबा रियासत, प्राचीन कटोच वंश की शाखा थी। यह रियासत अपनी शौर्यपरंपरा, राजपूती मर्यादा और सांस्कृतिक अस्मिता के लिए विख्यात रही। सिबा का दुर्ग राजनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था। राजमहलों में पली-बढ़ी सुभ देवी ने राजकुल की शालीनता, संयम और कूटनीति को आत्मसात किया।
शालीन उपस्थिति, राजनैतिक संतुलन और सांस्कृतिक संवाद
बेटे के जन्म के चार साल बाद ही मार्च 1865 में ‘सिबेई महारानी’ का जम्मू के राजमहल में उनका स्वर्गवास हुआ। ‘डोगरा डेंसटी हिस्टोरिकल रिकॉर्डस’ के मुताबिक शुभ देवी उन महारानियों में थीं, जिनका प्रभाव राजनीतिक घोषणाओं से नहीं, बल्कि राजमहल और राज दरबार शालीन उपस्थिति, राजनैतिक संतुलन और सांस्कृतिक संवाद से अंकित हुआ।
इतिहास की धारा में शुभ देवी साहिबा का नाम भले कम उच्चरित हो, परन्तु वे उस राजकीय परंपरा की प्रतिनिधि थीं, जिसने पर्वतीय अंचलों को एक सूत्र में पिरोया। यह संबंध हिमालयी रियासतों के परस्पर आत्मीय संबंधों का उदाहरण है, जहां वैवाहिक संबंध सामरिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण होते थे।
Note : AI Genreted photo
