शिमला की पहाड़ियों से उठा ‘सड्डा हक’, हिमाचल प्रदेश की युवाशक्ति और रॉक संगीत का ऐतिहासिक संगम है यह गीत
शिमला की पहाड़ियों से उठा ‘सड्डा हक’, हिमाचल प्रदेश की युवाशक्ति और रॉक संगीत का ऐतिहासिक संगम है यह गीत
मनोरंजन डेस्क। हिमाचल बिजनेस
हिमाचल प्रदेश की शांत पहाड़ियां जब किसी गीत की गूंज से कांप उठें, तो वह सिर्फ़ संगीत नहीं रहता, वह इतिहास बन जाता है। फ़िल्म रॉकस्टार का चर्चित गीत ‘सड्डा हक’ ऐसा ही एक गीत है, जिसकी ऊर्जा में शिमला एक अहम अध्याय बनकर उभरा।
साल 2011 में रिलीज़ हुए इस गीत ने भारतीय सिनेमा में रॉक म्यूज़िक को नई पहचान दी। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान, गीतकार इरशाद कामिल और गायक मोहित चौहान की तिकड़ी ने मिलकर इसे युवाओं के भीतर पल रहे असंतोष, सवालों और आत्मसम्मान की आवाज़ बना दिया।
शिमला के 200 युवा बने विद्रोही स्वर का हिस्सा
इस गीत की खास बात यह है कि इसके वीडियो शूट में शिमला के करीब 200 कलाकारों ने भाग लिया। ये वही युवा थे, जो पहले निर्देशक इम्तियाज़ अली के साथ जब वी मेट के गीत ‘ये इश्क़ है’ में काम कर चुके थे।
जब रॉकस्टार के लिए धर्मशाला में ‘सड्डा हक’ के कॉन्सर्ट सीन की शूटिंग हुई, तो इम्तियाज़ अली ने फिर से शिमला के इन युवाओं को बुलाया। पहाड़ों से आए इन चेहरों की ऊर्जा ने गीत को और भी जीवंत बना दिया।
शिमला से धर्मशाला तक, हक़ की आवाज़
‘सड्डा हक ऐथे रख’ यह पंक्ति सिर्फ़ पंजाब की ज़मीन तक सीमित नहीं रही। शिमला के युवाओं की भागीदारी ने इसे हिमाचल की पहाड़ियों में भी एक प्रतीक बना दिया। अपनी पहचान, अपनी आज़ादी और अपनी बात कहने के हक़ का प्रतीक।
यही वजह है कि यह गीत कॉलेजों, युवाओं के आंदोलनों और सामाजिक चर्चाओं में एक एंथम की तरह उभरा। संगीत समीक्षकों ने इसे आने वाले समय का ‘प्रोटेस्ट सॉन्ग’ बताया।
विवाद भी, विचार भी
गीत के कुछ दृश्य धर्मशाला के नोरबुलिंका मठ में शूट किए गए थे, जहां पृष्ठभूमि में दिखे फ्री तिब्बत झंडे को लेकर विवाद हुआ। सेंसर बोर्ड और निर्देशक के बीच टकराव हुआ, और अंततः दृश्य हटाने पड़े, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल और गहरा कर दिया—क्या कला को सच दिखाने का अधिकार नहीं?
शिमला के लिए गर्व का अध्याय
आज जब भी ‘सड्डा हक’ बजता है, तो उसके सुरों में शिमला की युवा भागीदारी की गूंज भी सुनाई देती है। यह गीत याद दिलाता है कि हिमाचल प्रदेश केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि विचारों, आवाज़ों और सांस्कृतिक आंदोलनों की भी भूमि है। ‘सड्डा हक’ शिमला के युवाओं के लिए सिर्फ़ एक गीत नहीं, वह हक़ मांगने की हिम्मत है।
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