सरवीन चौधरी : सियासत में आने से पहले रहीं ‘स्टार परफ़ॉर्मर’, पांच साल रहीं पंजाब यूनिवर्सिटी की ‘बेस्ट फोक डांसर’

सरवीन चौधरी : सियासत में आने से पहले रहीं ‘स्टार परफ़ॉर्मर’, पांच साल रहीं पंजाब यूनिवर्सिटी की ‘बेस्ट फोक डांसर’
सरवीन चौधरी : सियासत में आने से पहले रहीं ‘स्टार परफ़ॉर्मर’, पांच साल रहीं पंजाब यूनिवर्सिटी की ‘बेस्ट फोक डांसर’
विनोद भावुक। शाहपुर
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में कांगड़ा जिला के शाहपुर से संबंध रखने वाली सरवीन चौधरी भाजपा का एक मजबूत ओबीसी चेहरा मानी जाती हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि सियासी चमक बिखेरने से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी के मंचों पर पांच साल तक लगातार ‘बेस्ट फोक डांसर’ का खिताब उनके सिर पर सजता रहा है।
वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई लोक नृत्य प्रतियोगिताओं में हिमाचल प्रदेश की धड़कन बनकर उतरी थीं। पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दिनों में सरवीन अपने कॉलेज की स्टार परफ़ॉर्मर थीं। कांगड़ी, चम्बयाली, गिद्धा आदि लोकनृत्यों में उनकी पकड़ ऐसी थी नेशनल फेस्टिवल और फिर इंटरनेशनल मंचों तक उनकी धूम मच गई।
सियासी कद के नीचे दब गईं नृत्य की उपलब्धियां
सरवीन चौधरी कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुकी हैं कि नृत्य ने उन्हें अनुशासन, संतुलन और स्वाभाविक आत्मविश्वास दिया। लोकनृत्य ने उन्हें लोगों से जुड़ना सिखाया मंच पर खुद को साबित करना सिखाया और आत्मविश्वास भरकर नेतृत्व की राह खोल दी। विधायक और फिर मंत्री बनने तक का उनका सफर मंच की एक पक्की परफ़ॉर्मर की तरह है।
सियासत में बड़ा मुकाम हासिल करने की कीमत सरवीन ने अपने लोक नृत्य से दूर होकर चुकाई है। अगर उन्होंने राजनीति की राह नहीं पकड़ी होती तो वे देश की जानी- मानी ‘डांस गुरु’ होती। सियासी सुर्खियों के बीच प्रदेश के मीडिया में उनके नृत्य में सिरमौर होने के हुनर की बहुत कम ही चर्चा हो पाई है। नृत्य के रास्ते सियासत में चमकने का यह बिरला उदाहरण है।
साढ़े तीन दशक, मंत्री पद तक सफर
21 जनवरी 1966 को धर्मशाला में पैदा हुई सरवीन चौधरी 1992 में राजनीति में कदम रखा और शाहपुर में भाजपा की महिला मोर्चा मंडल प्रधान बनाई गईं। बाद में वे पार्टी की राज्य कार्यसमिति में शामिल रहीं और कांगड़ा ज़िले की भाजपा अध्यक्ष भी रहीं।
1998 में पहली बाद विधायक बनी और इसके बाद वे 2007, 2012 और 2017 में जीतीं। वे प्रेम कुमार धूमल और जयराम ठाकुर की सरकारों में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री और शहरी विकास मंत्री रहीं। 2022 में उन्हें कांग्रेस के केवल सिंह पठानिया ने लगभग 12,243 वोट से हराया।
संभावित उम्मीदवार हैं सरवीन
चुनावी हार के बावजूद सरवीन राजनीति से पीछे हटने वाली नेता नहीं हैं। वे पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो शाहपुर सीट पर भाजपा की पुनः पकड़, ओबीसी नेतृत्व की भूमिका, विधानसभा चुनाव में रणनीति, ये सभी ऐसे कारक हैं जिन पर सरवीन का प्रभाव मायने रखता है।
कांग्रेस सरकार के तीन साल हो गए हैं। नेता अपनी सियासी जमीन को मजबूत बनाने में जुट गए हैं। सरवीन चौधरी भी फिर से पार्टी और जनता के बीच अपनी भूमिका को तेज कर रही हैं। भविष्य के चुनाव में न सिर्फ़ टिकट की दावेदारी के लिए, बल्कि संगठन में भी मजबूती के लिए। सियासत संभावनाओं का खेल है और अभी तक सरवीन भाजपा की संभावित उम्मीदवार है।
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Jyoti maurya

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