18 साल तक नाहन की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट रहीं स्कॉटिश डॉक्टर बालफोर, जिनके प्रयास से 125 साल पहले नाहन में शुरू हो गया था फ़ीमेल मेडिकल स्कूल

18 साल तक नाहन की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट रहीं स्कॉटिश डॉक्टर बालफोर, जिनके प्रयास से 125 साल पहले नाहन में शुरू हो गया था फ़ीमेल मेडिकल स्कूल
18 साल तक नाहन की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट रहीं स्कॉटिश डॉक्टर बालफोर, जिनके प्रयास से 125 साल पहले नाहन में शुरू हो गया था फ़ीमेल मेडिकल स्कूल
विनोद भावुक। नाहन
सवा सौ साल पहले एक स्कॉटिश फ़ीमेल डॉक्टर मारगरेट आइडा बालफोर ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए नाहन में महिला एवं बाल चिकित्सा की पहल की। इंग्लैंड से डॉक्टर बन साल 1892 में भारत आने के बाद बालफोर ने जनाना हॉस्पिटल लुधियाना से अपने करियर की शुरुआत की और जल्दी ही नाहन के लेडी डफ़रिन हॉस्पिटल में जॉइन कर 18 साल तक मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के रूप में काम किया।
1920 में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘केसर- ए हिन्द’ मैडल से सम्मानित किया गया। 1924 में भारत छोड़कर यूके लौटने के बाद भी उन्होंने भारत के लिए काम जारी रखा। 1929 में उन्होंने ‘द वर्क ऑफ मेडिकल वुमेन इन इंडिया’ पुस्तक प्रकाशित की, जिसमें भारत की महिला चिकित्सकों की कहानी और योगदान दर्ज है। वे 1892 से 1924 तक चिकित्सा के तौर पर भारत में रहीं।
नाहन का फ़ीमेल मेडिकल स्कूल
बालफोर ने नाहन में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नींव रखी। उन्होंने स्थानीय ‘दाई’ और महिला हेल्थ वर्करों को प्रशिक्षित किया और नाहन में महिलाओं के लिए विशेष मेडिकल स्कूल की नींव डाली। महिलाओं की प्रसूति सुविधा में स्वच्छता और बेहतर व्यवस्थाएं लागू कीं। परंपरागत पर्दा प्रथा के तहत महिलाओं की चिकित्सा तक पहुंच सुनिश्चित की।
बालफोर ने बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य पर स्थानीय समाज में जागरूकता फैलाई। अस्पताल और क्लिनिक में नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण शुरू किए। बालफोर के प्रयासों से नाहन और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ और यह क्षेत्र महिला चिकित्सा सेवा का मॉडल बन गया।
पिता की बीमारी ने बना दिया डॉक्टर
21 अप्रैल 1866 को स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में जन्मीं बालफोर ने एडिनबर्ग स्कूल ऑफ़ मेडिसिन फॉर वुमेन और फ्रांस बेल्जियम से डॉक्टरेट की पढ़ाई की। चिकित्सा क्षेत्र में बालफोर की रुचि और प्रेरणा उनके निजी जीवन से जुड़ी थी। बचपन में उन्होंने परिवार में स्वास्थ्य संकट और पिता की बीमारी देखी, जिसने उन्हें स्वास्थ्य सुधार के लिए प्रतिबद्ध कर दिया।
बालफोर ने नाहन में महिलाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पायनियरिंग मॉडल प्रस्तुत किया। नाहन में लेडी डफ़रिन हॉस्पिटल और जनाना हॉस्पिटल की नींव उनके योगदान को दर्शाती है। उनके
प्रयासों से नाहन महिला स्वास्थ्य और प्रसूति सेवाओं में अग्रणी बन गया। उनके कार्यों का असर आज भी नाहन में महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं में महसूस किया जा सकता है।
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Jyoti maurya

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