सच में धरती पर स्वर्ग सा था 173 साल पहले का शिमला, 1852 की दुर्लभ पुस्तक में छ्पी तस्वीरें देती हैं गवाही
सच में धरती पर स्वर्ग सा था 173 साल पहले का शिमला, 1852 की दुर्लभ पुस्तक में छ्पी तस्वीरें देती हैं गवाही
विनोद भावुक। शिमला
173 साल पहले का शिमला कैसा था, इसे देखना चाहते हो तो आपको 1852 में प्रकाशित मिसेज डब्ल्यू.एल.एल. स्कॉट की लिखी ‘Views in the Himalayas‘ के अंदर झांकना होगा। इस दुर्लभ पुस्तक में हिमालय की सुंदरता और उस समय के पर्यावरण का अद्भुत दस्तावेज़ संजोया गया है। इस फोलियो (बड़े आकार की पुस्तक) में 15 रंगीन टिंटेड लिथोग्राफ़ (चित्र) हैं, जिनमें हिमालय शिखरों, शिमला और उसके आस पास की वादियों, कसौली के मैदानों तथा स्थानीय निवासों को बारीकी से दिखाया गया है।
इस पुस्तक का प्रकाशन लंदन में Messrs Henry Graves & Co. ने किया था और इसे Allen & Co. लंदन तथा Ostell & Lepage कलकत्ता के जरिये भारत में भी बेचा गया था। पहले संस्कारण में पांच हजार प्रतियां छापी गईं थी। हाथ से रंगी दुनिया भर की दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह करने वाली वेबसाइट https://www.splrarebooks.com/ ने इस पुस्तक को ‘इंडियाट्रैवल/सीनरी’ सेक्शन के तहत चित्रों सहित पब्लिश किया है।

शिमला और कसौली की खूबसूरती
किताब के एक दृश्य में ‘Kussowlie and the plains beyond – sunrise’ दिखाया गया है, जिसमें कसौली को सूर्योदय के समय चित्रित किया गया है। 1840 के दशक में यह जगह एक ऊँचाई वाला हिल स्टेशन हुआ करती थी, जहाँ ब्रिटिश सिपाहियों को आराम के लिए भेजा जाता था। पुस्तक के एक रंगीन चित्र में शिमला के पास ‘Old Hindu Temple above the waterfalls’ का दृश्य भी शामिल है, जो उस समय के मंदिरों और प्राकृतिक वॉटरफॉल के आसपास की सुन्दरता को दिखाता है।

पहाड़ी जीवन का जीवंत रिकॉर्ड
पुस्तक न सिर्फ हिमालय की भौगोलिक सुंदरता का बयान करती है, बल्कि उस युग के क्लाइमेट, कपड़े, पशु पक्षी, कृषि समेत स्थानीय जीवन की एक झलक भी देती है। यह एक प्रकार से 1800 के मध्य की ब्रिटिश कालीन यात्राओं और पहाड़ों से जुड़े जीवन का जीवंत रिकॉर्ड है। दुर्लभ पुरालेखों में से यह पुस्तक शिमला कसौली क्षेत्र की 19वीं सदी की कहानी को चित्रों में प्रकट करती है। तस्वीरें आज भी उस समय की याद दिलाती हैं, जब शिमला की प्राकृतिक सुन्दरता विश्वभर को अपनी ओर खींचती थी।

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