शिमला से चलने वाले अलायंस बैंक की शाखाएं लाहौर, लखनऊ, पेशावर, रावलपिंडी, रंगून और कलकत्ता तक थीं, 49 साल बाद हुआ बैंक का नाटकीय पतन
शिमला से चलने वाले अलायंस बैंक की शाखाएं लाहौर, लखनऊ, पेशावर, रावलपिंडी, रंगून और कलकत्ता तक थीं, 49 साल बाद हुआ बैंक का नाटकीय पतन
हिमाचल बिजनेस, शिमला
ब्रिटिश राज में भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहा शिमला ब्रिटिश भारत के वित्तीय प्रयोगों का भी गवाह रहा। 1874 में शिमला से एक बैंक ने अपनी शुरुआत की। इस बैंक का नाम था अलाइन्स बैंक ओ इंडिया। करीब आधी सदी तक के इसके सफर में विस्तार, अधिग्रहण, महत्वाकांक्षा और आखिर में एक नाटकीय पतन शामिल है।
अलायंस बैंक की स्थापना 1874 में हुई। इससे पहले 1866 में स्थापित ‘यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया’ का स्वैच्छिक परिसमापन किया गया और उसी के कारोबार को संभालते हुए अलायंस बैंक ने काम शुरू किया। ब्रिटिश प्रबंधन में चलने वाला यह बैंक भारत में ही पंजीकृत था और शिमला इसकी जन्मस्थली और मुख्यालय था।
बर्मा तक फैला था बैंक का कारोबार
शिमला उस समय ब्रिटिश अधिकारियों और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र था, बैंकिंग विस्तार के लिए आदर्श स्थान बना। अलायंस बैंक ने अन्य असफल बैंकों का अधिग्रहण कर अपनी शाखाएँ तेजी से बढ़ाईं। 49 वर्षों में इसकी 36 शाखाएँ हो गईं, लाहौर, लखनऊ, पेशावर, रावलपिंडी, रंगून और कलकत्ता तक। 1889 में कलकत्ता के डलहौज़ी स्क्वायर में इसकी शाखा खुली।
1916-17 के बीच इस बैंक ने ‘पंजाब बैंकिंग कंपनी’, ‘दिल्ली एंड लंदन बैंक’ और ‘बैंक ऑफ रंगून’ जैसे संस्थानों का अधिग्रहण किया। बैंक के विस्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिमला की पहाड़ियों से शुरू हुआ यह बैंक उत्तर भारत और बर्मा तक फैल चुका था। बाद में कलकत्ता के डलहौज़ी स्क्वायर का बैंक का भवन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधीन आया।
सट्टेबाजी के चलते डूब गया नामी बैंक
1922 में बैंक ने अपना मुख्यालय शिमला से कलकत्ता स्थानांतरित कर दिया, लेकिन 27 अप्रैल 1923 को अचानक बैंक ध्वस्त हो गया। प्रबंधन द्वारा की गई सट्टेबाजी और लंदन की ‘बोलटन ब्रथर्स कंपनी के साथ वित्तीय गड़बड़ियां बैंक के पतन का मुख्य कारण था। जब बैंक डूबा, तो हजारों ग्राहकों की जमा पूंजी फंस गई।
अलायंस बैंक की कहानी शिमला के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। कई असफल बैंकों का अधिग्रहण कर सफलता की कहानी लिखने वाली यह बैंकिंग संस्था खुद भी एक दिन धराशायी हो जाएगी, उस वक्त शायद की किसी ने कल्पना की हो। पारदर्शिता, जिम्मेदारी और सतर्कता के अभाव में आखिर यह बैंक इतिहास की बात हो गई।
भरोसे खोने पर ढह जाती हैं आर्थिक संस्थाएं
आधी सदी का सफर बताता है कि आर्थिक विकास के साथ जोखिम जुड़े होते हैं। सफलता के शिखर पर पहुँच कर भी बैंक गलत नीतियों से धराशायी हो सकता है। जब अलायंस बैंक डूबा, इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया ने इसकी परिसंपत्तियों को अपने अधीन लिया। इम्पीरियल बैंक ही आगे चलकर भारतीय बैंकिंग सिस्टम की धुरी बना।
शिमला भारत की बैंकिंग विरासत के लिए भी याद किया जाता है। अलायंस बैंक ऑफ शिमला का उत्थान और पतन हमें यह सिखाता है कि आर्थिक संस्थाएँ भरोसे पर टिकती हैं और भरोसा खोने पर साम्राज्य भी ढह जाते हैं। आधुनिक बैंकिंग और डिजिटल लेन-देन के बीच शिमला के बैंक की कहानी हमें पारदर्शिता, जिम्मेदारी और सतर्कता का महत्व याद दिलाती है।
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