शिमला का टाउन हॉल: 115 साल पहले अंबाला के मशहूर मुरली धर एंड संस प्रकाशक ने छापा था कोलोटाइप पोस्टकार्ड

शिमला का टाउन हॉल: 115 साल पहले अंबाला के मशहूर मुरली धर एंड संस प्रकाशक ने छापा था कोलोटाइप पोस्टकार्ड
शिमला का टाउन हॉल: 115 साल पहले अंबाला के मशहूर मुरली धर एंड संस प्रकाशक ने छापा था कोलोटाइप पोस्टकार्ड
हिमाचल बिजनेस। शिमला
ब्रिटिशकालीन शिमला की ऐतिहासिक धरोहरों में से टाउन हाल शामिल है, जिसकी 1910 के आसपास की एक दुर्लभ पोस्टकार्ड छवि आज इतिहास प्रेमियों के लिए खजाने से कम नहीं है। यह पोस्टकार्ड अंबाला के प्रसिद्ध प्रकाशक मुरली धर एंड संस ने प्रकाशित किया गया था। यह कोलोटाइप प्रिंट ‘डिवाइडेड बैक’ शैली में था, जो उस दौर के पोस्टकार्ड डिजाइन की खास पहचान थी।
1880 के दशक के अंत में निर्मित यह गोथिक शैली से प्रेरित इमारत शिमला के प्रशासनिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र थी। नगर निगम कार्यालय, सार्वजनिक पुस्तकालय ऐतिहासिक गेयटी थियेटर
तीनों संस्थान एक ही छत के नीचे संचालित होते थे। यह इमारत ब्रिटिश वास्तुकला की भव्यता का प्रतीक मानी जाती थी।
टाउन हाल का रुतबा
यह भव्यता अधिक समय तक टिक नहीं पाई। 1913 के आसपास इस इमारत को ध्वस्त करना पड़ा।
इतिहासकार राजा भसीन ने अपनी पुस्तक Simla: The Summer Capital of British India (2011) में नगर पालिका की इंजीनियरिंग रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि निर्माण में निम्न-स्तरीय सामग्री, विशेषकर घटिया पत्थर का उपयोग हुआ था। यह पत्थर भारी वजन और वर्षा से होने वाले क्षरण को सहन नहीं कर पाया।
शिमला जैसे पर्वतीय क्षेत्र में जहां लगातार नमी और बारिश होती है, वहां मजबूत निर्माण सामग्री अनिवार्य होती है। इस चूक ने एक भव्य संरचना को महज दो दशकों में इतिहास बना दिया। पुराना टाउन हॉल अस्तित्व में नहीं रहा, लेकिन गेयटी थियेटर आज भी शिमला की पहचान है। यह स्थल कभी ब्रिटिश अधिकारियों, साहित्यकारों और रंगकर्मियों का पसंदीदा मंच हुआ करता था।
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Jyoti maurya

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