कांगड़ा की कई वनस्पति प्रजातियों को पहली बार वैज्ञानिक पहचान दिलाने वाले स्कॉटिश वैज्ञानिक सर जॉर्ज वाट

कांगड़ा की कई वनस्पति प्रजातियों को पहली बार वैज्ञानिक पहचान दिलाने वाले स्कॉटिश वैज्ञानिक सर जॉर्ज वाट
कांगड़ा की कई वनस्पति प्रजातियों को पहली बार वैज्ञानिक पहचान दिलाने वाले स्कॉटिश वैज्ञानिक सर जॉर्ज वाट
विनोद भावुक। धर्मशाला
उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में जब भारत में वैज्ञानिक वनस्पति अध्ययन अपने शुरुआती दौर में था, तब सर जॉर्ज वाट ने कांगड़ा की गहन यात्राएं कीं। 1879 में चंबा और कांगड़ा में उनके वनस्पति सर्वेक्षण ने कई नई प्रजातियों को पहली बार वैज्ञानिक पहचान दिलाई। कई पौधों के नाम उनके नाम पर रखे गए। ये इस बात की गवाही हैं कि कांगड़ा ने वैश्विक वनस्पति विज्ञान को कितना समृद्ध किया।
बहुत कम लोग जानते हैं कि कांगड़ा की वनस्पतियों और औषधीय पौधों को दुनिया के वैज्ञानिक नक़्शे पर लाने में एक स्कॉटिश वैज्ञानिक सर जॉर्ज वाट की अहम भूमिका रही। कांगड़ा की जलवायु और मिट्टी में पनपने वाले पौधों ने उन्हें यह समझने में मदद की कि धौलाधार आर्थिक और औषधीय दृष्टि से भी अपार संभावनाओं से भरा है।
चाय के कीटों व रोगों पर ऐतिहासिक रिपोर्ट
सर जॉर्ज वाट का कांगड़ा से रिश्ता सिर्फ़ जंगलों तक सीमित नहीं था। उन्होंने असम और कांगड़ा की चाय की खेती पर विशेष अध्ययन किया और 1898 में चाय के कीटों व रोगों पर एक ऐतिहासिक रिपोर्ट प्रकाशित की। उस दौर में यह रिपोर्ट कांगड़ा के चाय बागानों के लिए जीवनरेखा साबित हुई, क्योंकि बागान प्रबंधकों को रोग नियंत्रण की वैज्ञानिक दिशा मिली।
जॉर्ज वाट की का काम एक प्रेरणा है कि स्थानीय प्रकृति को यदि वैज्ञानिक दृष्टि से समझी जाए, तो वह दुनिया भर के लिए ज्ञान और समृद्धि का स्रोत बन सकती है। आज जब जैव-विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की बात हो रही है, तब कांगड़ा का यह ऐतिहासिक अध्याय हमें अपनी जड़ों और जंगलों की क़ीमत समझने का संदेश देता है।
‘द डिक्शनरी ऑफ़ इकोनॉमिक प्रोडक्ट्स ऑफ़ इंडिया’
जॉर्ज वाट का महान कार्य ‘द डिक्शनरी ऑफ़ इकोनॉमिक प्रोडक्ट्स ऑफ़ इंडिया’ आज भारत की वनस्पति संपदा का विश्वकोश माना जाता है। इस ग्रंथ में कांगड़ा और पश्चिमी हिमालय की लकड़ी, रेशे, औषधीय पौधे और कृषि उत्पादों का विस्तार से उल्लेख है। यही वजह है कि आज भी शोधकर्ता कांगड़ा की जैव विविधता को समझने के लिए वाट के संदर्भों का सहारा लेते हैं।
कांगड़ा सिर्फ़ देवभूमि नहीं, यहां जड़ी- बूटियों का अनमोल खजाना है। इस क्षेत्र में औषधीय संपदा का बड़ा और अमूल्य भंडार है। जॉर्ज वाट ने यहां की औषधीय पौधों और कृषि उत्पादों के भविष्य के लिए नए दरवाजे खोले और वनस्पति वैज्ञानिकों को इस दिशा में काम करने के लिए आरंभिक जानकारियां उपलब्ध करवाईं। जॉर्ज वाट कांगड़ा के औषधीय खजाने की वैश्विक पहचान के मूक नायक हैं।
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Jyoti maurya

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