दूसरी और पाँचवीं में देश भर के स्टूडेंट्स पढ़ेंगे सुंदरनगर के पवन चौहान की कहानियां, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल

दूसरी और पाँचवीं में देश भर के स्टूडेंट्स पढ़ेंगे सुंदरनगर के पवन चौहान की कहानियां, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल
दूसरी और पाँचवीं में देश भर के स्टूडेंट्स पढ़ेंगे सुंदरनगर के पवन चौहान की कहानियां, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल
सत्य प्रकाश। मंडी
हिंदी बाल साहित्य के क्षेत्र में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। साहित्यकार पवन चौहान की दो बाल कहानियां अब सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध निजी विद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई हैं। सत्र 2025–26 से देशभर के विद्यार्थी इन कहानियों को अतिरिक्त पठन के अंतर्गत पढ़ेंगे। यह उपलब्धि लेखक औरहिंदी बाल साहित्य के लिए बड़ी सफलता है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप ‘आनंदी कहानी संचय’
ये कहानियां वोल्ट प्रकाशन की पाठ्यपुस्तक श्रृंखला ‘आनंदी कहानी संचय’ में शामिल की गई हैं। यह श्रृंखला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 की दूरदर्शी सोच के अनुरूप तैयार की गई है। इसका उद्देश्य भाषा-ज्ञान बढ़ाना और बच्चों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना है।
कक्षा के अनुसार अर्थपूर्ण कहानियां
दूसरी कक्षा के लिए चुनी गई कहानी ‘बाय चींटियों!’ बच्चों को अच्छी आदतों और अनुशासन का सहज संदेश देती है। पाँचवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए कहानी ‘कृपया रुक जाओ!’ खान-पान और स्वास्थ्य से जुड़े मूल्यों को रोचक कथानक के साथ प्रस्तुत करती है। इन पुस्तकों का संकलन और संपादन सुप्रसिद्ध भाषाविद् एवं बाल साहित्यकार गुरप्रीत शर्मा ने किया है।
यह पहला अवसर नहीं है जब पवन चौहान की रचनाएं शिक्षा जगत में स्थान पा रही हों। इससे पहले भी उनकी कृतियां सरकारी व निजी विद्यालयों, तथा केरल और महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में पढ़ाई जा चुकी हैं। यह निरंतरता उनके लेखन की गुणवत्ता और शैक्षिक उपयोगिता का प्रमाण है।
लेखन से अध्यापन तक समर्पित साहित्यिक यात्रा
मंडी जिला के सुंदरनगर उपमंडल के महादेव निवासी पवन चौहान कविता, कहानी, बाल कहानी और फीचर लेखन में समान रूप से सक्रिय हैं। वर्ष 2014 में उन्होंने ‘राष्ट्रीय सहारा’ समाचार पत्र की रविवारीय मैगजीन ‘उमंग’ में ‘टूर’ नामक पर्यटन स्तंभ नियमित रूप से लिखा। इसके अलावा, विभिन्न पत्रिकाओं के बाल साहित्य विशेषांकों का अतिथि संपादन भी कर चुके हैं।
पवन चौहान हिंदी के प्रवक्ता हैं और अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें विविध विषयों को सरल, रोचक और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उनकी बाल कहानियों के महत्व को रेखांकित करते हुए हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में उनकी बाल कहानियों का आलोचनात्मक विश्लेषण’ विषय पर लघु शोध भी सम्पन्न हो चुका है।

Jyoti maurya

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