पहाड़ का हुनर : नई दिल्ली के गंगा राम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन हमीरपुर के दसमाल गांव के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. डी.एस. राणा

पहाड़ का हुनर : नई दिल्ली के गंगा राम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन हमीरपुर के दसमाल गांव के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. डी.एस. राणा
पहाड़ का हुनर : नई दिल्ली के गंगा राम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन हमीरपुर के दसमाल गांव के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. डी.एस. राणा
अजय शर्मा। हमीरपुर
यह सिर्फ़ एक डॉक्टर की सफलता की प्रेरक कहानी भर नहीं है। यह हिमाचल प्रदेश की मिट्टी से उपजी सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदना का जीवंत उदाहरण है। देश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में शुमार सर नई दिल्ली के गंगा राम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. डी.एस. राणा हमीरपुर के एक छोटे से गांव दसमाल से संबंध रखते हैं।
आईजीएमसी शिमला से एमबीबीएस और पीजीआई चंडीगढ़ से नेफ्रोलॉजी में उच्च प्रशिक्षण करने के बाद डॉ. डी.एस. राणा क्लीवलैंड क्लिनिक, ओहायो (अमेरिका) में अंतरराष्ट्रीय स्कॉलर बने और आधुनिक किडनी उपचार और ट्रांसप्लांट की बारीकियां सीखीं। डॉ. राणा को किडनी ट्रांसप्लांट और जटिल नेफ्रोलॉजी प्रक्रियाओं में देश-विदेश में ख्याति मिली।
किडनी के उपचार के लिए पदमश्री का उफार
डॉ. डी.एस. राणा सर गंगा राम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन हैं और अस्पताल के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य हैं। किडनी के उपचार के लिए वे दुनिया भर में मशहूर हैं। वे हमेशा अपने काम के प्रति समर्पित रहने वाले चिकित्सक हैं और उनकी अगुवाई में हजारों मरीजों को नया जीवन मिला है।
हिमाचल प्रदेश के पहले यह गर्व की बात है कि साल 2009 में भारत सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए डॉ. डी.एस. राणा को पद्मश्री से सम्मानित किया है। पहाड़ की मिट्टी में पाला यह लाल आज देश की सेहत संभाल रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन चुका है।
दिल्ली में कमाल, गांव की संभाल
सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी डॉ. राणा ने अपने गांव को नहीं भुलाया। उन्होंने पार्वती एजुकेशन एंड हेल्थ सोसायटी के माध्यम से दसमाल गांव में 5 बिस्तरों वाला अस्पताल स्थापित करवाया, ताकि ग्रामीणों को उनके घर के पास ही इलाज मिल सके। उनकी यह पहल बताती है कि उनके लिए चिकित्सा केवल पेशा नहीं, सेवा का संकल्प है।
डॉ. राणा की आसमान छूने की यह कहानी हिमाचल प्रदेश के हर स्टूडेंट को यह सिखाती है कि सपने बड़े हों, जड़ें अपनी मिट्टी में रहें, शिक्षा और सेवा साथ-साथ चलें और सफलता के बाद लौटकर समाज को मजबूत करें। सच में डॉ. राणा ने अपनी जड़ों से जुड़ कर समाज और नई पीढ़ी को बड़ा संदेश दिया है।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/from-himalayan-craft-to-himachal-box-kullus-kiran-thakurs-mountain-journey-has-truly-put-a-value-on-her-handiwork/

Jyoti maurya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *