शिमला में तैनात हुई थी देश की पहली महिला डिप्टी कमिश्नर, 1956 में पंजाब की सरला ग्रेवाल के नाम दर्ज हुआ रिकॉर्ड

शिमला में तैनात हुई थी देश की पहली महिला डिप्टी कमिश्नर, 1956 में पंजाब की सरला ग्रेवाल के नाम दर्ज हुआ रिकॉर्ड
शिमला में तैनात हुई थी देश की पहली महिला डिप्टी कमिश्नर, 1956 में पंजाब की सरला ग्रेवाल के नाम दर्ज हुआ रिकॉर्ड
विनोद भावुक। शिमला
शिमला सिर्फ पहाड़ों की रानी ही नहीं, बल्कि उन ऐतिहासिक कदमों का भी साक्षी रहा है, जिन्होंने भारत के प्रशासनिक इतिहास की दिशा बदली। ऐसी ही एक ऐतिहासिक शख्सियत थीं सरला ग्रेवाल। पंजाब से संबंध रखने वाली 1952 बैच की आईएएस अधिकारी, जिन्होंने शासन को संवेदनशील, सख्त और दूरदर्शी बनाने की मिसाल भी पेश की। 1956 में उन्हें डिप्टी कमिश्नर बनाया गया। वे देश की पहली महिला डीसी बनीं।
उस दौर में, जब प्रशासन पुरुषों का गढ़ माना जाता था, शिमला ने एक ऐसी अधिकारी को देखा जो फैसलों में दृढ़, काम में तेज और जनता के प्रति जवाबदेह थी। सरला ग्रेवाल के कड़े अनुशासन और साफ़-सुथरे कामकाज से व्यवस्था खुद अनुशासन में आ गई। शिमला से शुरू हुआ यह सफर पंजाब, दिल्ली और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचा।
प्रधानमंत्री की प्रधान सचिव, मध्य प्रदेश की राज्यपाल
सरला ग्रेवाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, महिला एवं समाज कल्याण, हर क्षेत्र में उन्होंने नीतियों को जमीन पर उतारने का काम किया। पंजाब में स्वास्थ्य सचिव रहते हुए राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम में राज्य को चार सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार दिलवाना सरला ग्रेवाल की कार्यकुशलता का प्रमाण है। उन्होंने महिला साक्षरता, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, प्रौढ़ शिक्षा और छोटे परिवार को जन-आंदोलन बनाया।
लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से लेकर यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र तक, भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने विकासशील देशों के लिए सामाजिक सेवाओं का सशक्त मॉडल रखा। प्रशासनिक शिखर पर पहुंचते-पहुंचते वे प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रधान सचिव बनीं और फिर मध्य प्रदेश की राज्यपाल (1989–1990) नियुक्त हुईं।
‘सरोवर हमारी धरोहर’ की नायिका
31 मार्च 1989 से 5 फरवरी 1990 तक मध्यप्रदेश की राज्यपाल रहते हुए उन्होंने तालाबों और जलस्रोतों के संरक्षण को जनआंदोलन बनाया। ‘सरोवर हमारी धरोहर’ अभियान ने राजधानी से लेकर दूर-दराज़ जिलों तक स्वच्छता और जल-संरक्षण की चेतना जगाई। मध्य प्रदेश में पानी के संरक्षण की पहल आज भी उनकी पहचान मानी जाती है।
बतौर राज्यपाल भी उनका कार्यकाल सख्त अनुशासन और स्पष्ट निर्णयों के लिए याद किया जाता है। सेवानिवृति के बाद वे ट्रिब्यून ट्रस्ट की अध्यक्ष रहीं। 29 जनवरी 2002 को चंडीगढ़ में उनका निधन हुआ, लेकिन शिमला आज भी उस महिला अधिकारी को याद करता है, जिसने यहां से इतिहास रचा। सरला ग्रेवाल उस पीढ़ी की प्रतीक हैं, जिसने साबित किया कि प्रशासन में संवेदना और सख्ती साथ-साथ चल सकती हैं।
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Jyoti maurya

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