शिमला के संस्थापक के तौर पर मशहूर अंग्रेज़ आर्मी अफसर, जिनके घर ‘कैनेडी हाउस’ के नाम दर्ज है शिमला का पहला यूरोपीय आवास होने का रिकॉर्ड
शिमला के संस्थापक के तौर पर मशहूर अंग्रेज़ आर्मी अफसर, जिनके घर ‘कैनेडी हाउस’ के नाम दर्ज है शिमला का पहला यूरोपीय आवास होने का रिकॉर्ड
विनोद भावुक। शिमला
कुछ शहर योजनाओं से नहीं बनते, कुछ शहर यात्राओं से जन्म लेते हैं। शिमला एक ब्रिटिश आर्मी अफ़सर की यात्रा का सबसे ख़ूबसूरत परिणाम है। कम ही लोग जानते हैं कि 215 साल पहले शिमला की नींव एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट-कर्नल चार्ल्स प्रैट कैनेडी की एक साधारण यात्रा से पड़ी थी। उनकी यह यात्रा ऐतिहासिक हो गई और शिमला जैसा छोटा सा पहाड़ी गांव लंदन तक मशहूर हो गया।
1810 के आसपास बंगाल आर्टिलरी में तैनात कैनेडी जब सुबाथू में सेवा दे रहे थे, तब उन्होंने गर्मियों की तपिश से राहत पाने के लिए आसपास की पहाड़ियों की ओर रुख़ किया। ‘हिस्ट्री ऑफ शिमला (कोलोनियल पीरियड)’ में कैनेडी के शिमला आने और बस जाने की कहानी पढ़ी जा सकती है। कैनेडी को इतिहासकार शिमला का संस्थापक मानते हैं।
प्रशासनिक केंद्र के रूप में शिमला का विकास
‘ब्रिटिश समर कैपिटल ऑफ इंडिया- शिमला’ पुस्तक में शिमला के ब्रिटिश भारत की राजधानी बनने की कथा को बुना गया है। इस कथा की शुरुआत ही ‘कैनेडी हाउस’ के निर्माण से होती है। घने देवदार, ठंडी हवा और शांत वातावरण से प्रभावित होकर कैनेडी ने शिमला की पहाड़ियों को रहने के लिए चुना और यहां पहला पक्का यूरोपीय आवास बनवाया, जो ‘कैनेडी हाउस’ के नाम से मशहूर हुआ।
कैनेडी के बाद कई ब्रिटिश अधिकारी शिमला की ओर आकर्षित होने लगे। धीरे-धीरे यह पहाड़ी इलाका अंग्रेजों का सैन्य विश्राम स्थल बन गया। अब तक शिमला को लेकर चर्चे लंदन तक होने लगे। ब्रिटिश हुकूमत ने शिमला को प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित की योजना पर काम करना शुरू किया, जिसके चलते शिमला की पहाड़ियों पर यूरोपियन स्टाइल की इमारतें बनने का सिलसिला शुरू हुआ।
शिमला का राजधानी तक का सफर
कैनेडी ने जब शिमला में पहला यूरोपियन स्टाइल का घर बनवाया था, तक शायद ही सोचा होगा कि शिमला भविष्य में पूरे ब्रिटिश साम्राज्य की प्रशासनिक रीढ़ बन जाएगा। 1864 में ब्रिटिश सरकार ने शिमला को ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया। अब ब्रिटिश हुकूमत साल में छह महीनें शिमला से भारत पर राज करने लगे, जो भारत की आजादी तक जारी रहा।
आज भी शिमला में ब्रिटिश दौर की कई हेरिटेज इमारतें उस दौर की निर्माणकला और वास्तुकला की जीवंत मिशाल हैं। मॉल रोड, रिज, क्राइस्ट चर्च और गेयटी थिएटर जैसी कई इमारतें औपनिवेशिक दौर की देन हैं। 25 मई 1875 को इंग्लैंड के चेल्टनहैम में लेफ्टिनेंट-कर्नल चार्ल्स प्रैट कैनेडी का निधन हुआ, लेकिन शिमला की इन पहाड़ियों में उनका नाम हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
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