कांगड़ा के दानवीर राजा जय चंद कटोच की यादगार, मायो कॉलेज अजमेर का ‘कांगड़ा एम्फीथिएटर’ शानदार
कांगड़ा के दानवीर राजा जय चंद कटोच की यादगार, मायो कॉलेज अजमेर का ‘कांगड़ा एम्फीथिएटर’ शानदार
विनोद भावुक। धर्मशाला
मायो कॉलेज अजमेर का ‘कांगड़ा एम्फीथिएटर’ भावनात्मक और वास्तुशिल्प का अद्भुत नमूना है, जो
जय चंद कटोच ने ‘सम्राट विजया’ नाम के समाचार पत्र की स्थापना की। उन्होंने सुजानपुर में 170 एकड़ का चौगान सार्वजनिक पार्क के रूप में दान कर दिया था। उन्होंने अपने राज्य को एक मिडिल स्कूल भवन भी उपहार में दिया था। भारत में हिंदुओं के प्रमुख धार्मिक संगठन भारत धर्म महामंडल ने उन्हें धर्मरत्न की उपाधि दी थी।
फिर से जी उठा ‘कांगड़ा एम्फीथिएटर’
‘कांगड़ा एम्फीथिएटर’ कॉलेज परिसर के गर्व का हिस्सा है, जिसे नवीनतम स्वरूप में पुनर्निर्मित किया गया है। एम्फीथिएटर की क्षमता लगभग 2000 दर्शक की बनाई गई है। कांगड़ा राजघराने के वारिस ऐश्वर्या कटोच ने अपने परदादा की यादगार इस एम्फीथिएटर के जीर्णोद्वार के लिए दान दिया, जिससे इसके पुनर्निर्माण का काम पूरा हुआ।
इसके पुनर्निर्माण में खाटू पत्थर और लाल कारोली पत्थर का उपयोग किया गया, ताकि स्थानीय राजस्थानी शैली और रंग संयोजन कॉलेज की अन्य इमारतों से मेल खा सके। एम्फीथिएटर की सीढ़ियां, पंक्तियाँ और पवेलियन प्रकाश-छाया खेल के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए। प्राकृतिक ध्वनिकी को ध्यान में रखकर इसे डिज़ाइन किया गया है।
राजघरानों का मनपसंद कॉलेज
‘कांगड़ा एम्फीथिएटर’ के मंच और दर्शक दीर्घा की व्यवस्था इस तरह की गई है कि सभी तक आवाज़ पहुंचे। पत्थर की रेलिंग, गैलरी और नीचे की कला दीर्घाएँ इस स्थल को स्टूडेंट्स गतिविधियों और संवाद स्थल के रूप में उपयोगी बनाती हैं। एम्फीथिएटर में स्थानीय पत्थर और डिज़ाइन भाषा को शामिल किया गया है।
भारत में इटन कहा जाने वाला 1875 में स्थापित मायो कॉलेज भारत के राजघरानों के बच्चों को शिक्षा देने वाली एक प्रतिष्ठित संस्था रही है। 150 साल पुराना मायो कॉलेज आज भी देश के नामी उच्च शिक्षण संस्थानों में अपनी खास पहचान रखता है, जिसका संबंध कांगड़ा से भी है।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/charlotte-canning-indias-first-female-watercolor-painter-who-created-famous-paintings-like-kangra-fort/
