नेशनल आर्मी म्यूजियम लंदन के रिकॉर्ड में कांगड़ा किले की ऑन द स्पॉट तस्वीरें, कांगड़ा किले का सबसे प्रामाणिक ब्रिटिश चित्र रिकॉर्ड
नेशनल आर्मी म्यूजियम लंदन के रिकॉर्ड में कांगड़ा किले की ऑन द स्पॉट तस्वीरें, कांगड़ा किले का सबसे प्रामाणिक ब्रिटिश चित्र रिकॉर्ड
विनोद भावुक। कांगड़ा
‘सिक्स वियूज ऑफ कोट कांगड़ा एंड द सराउडिंग कंट्री’ केवल एक चित्र पुस्तक नहीं है। यह कांगड़ा के इतिहास, भूगोल और औपनिवेशिक सैन्य दृष्टि का दुर्लभ दस्तावेज़ है। इसे तैयार किया था लेफ्टिनेंट कर्नल अलेक्ज़ेंडर जैक ने, जो खुद युद्धभूमि पर मौजूद थे। उन्होंने ऑन द स्पॉट यानी मौके पर की गई स्केचिंग थी, जो नेशनल आर्मी म्यूजियम लंदन के सतलुज कॅम्पेन रिकॉर्ड के रूप में संरक्षित हैं।
पुस्तक में कांगड़ा को एक ऐसा इलाका बताया गया है, जो सुंदर, उपजाऊ और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण था। जालंधर, दोआब के पहाड़ी दुर्गों में कोट कांगड़ा को सबसे मज़बूत और अहम बताया गया है। छह लिथोग्राफ़िक प्लेट्स में ब्रिटिश सेना का पहाड़ों से गुजरना, किले की प्राचीरें, घाटियाँ, नदियाँ और खेत और आसपास का ग्रामीण जीवन सब कुछ बेहद बारीकी से उकेरा गया है।
सैनिक कलाकार की आख़िरी अमानत
‘सिक्स वियूज ऑफ कोट कांगड़ा एंड द सराउडिंग कंट्री’ का प्रथम संस्करण लार्ज फोलियो (610 × 445 मिमी) में प्रकाशित हुआ, जो अपने आप में एक शाही आकार है। चित्रों की इस पुस्तक में टिंटेड लिथोग्राफ्ड पिक्टोरियल टाइटल और लेटरप्रेस डेडिकेशन इसमें शामिल हैं और डिस्क्रिप्टिव टेक्स्ट का अलग पृष्ठ है।
हाथ से रंगी हुई छह लिथोग्राफ़ प्लेट्स को अपने दौर के श्रेष्ठ टोपोग्राफ़िकल आर्टिस्ट जी चिल्ड्स, जे पीकेन, टीएस बॉय और डबल्यू वाल्टन जैसे नामी कलाकारों ने तैयार किया। अलेक्ज़ेंडर जैक का अंत 1857 के कानपुर विद्रोह के दौरान हुआ। यह कृति कांगड़ा के इतिहास के दस्तावेज़ सहित जैक जैसे सैनिक कलाकार की आख़िरी अमानत भी है।
इसलिए आज भी महत्वपूर्ण यह कृति
‘सिक्स वियूज ऑफ कोट कांगड़ा एंड द सराउडिंग कंट्री’ कांगड़ा किले का सबसे प्रामाणिक ब्रिटिश दृश्य रिकॉर्ड है। यह औपनिवेशिक सैन्य अभियान की विज़ुअल हिस्ट्री का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। यह कांगड़ा की भौगोलिक सुंदरता का 19वीं सदी का चित्रात्मक साक्ष्य है और यह समझने का अवसर कि अंग्रेज़ कांगड़ा को कैसे देखते थे।
अलेक्ज़ेंडर जैक ने कांगड़ा किले पर कब्जे के लिए भेजी गई ब्रिटिश सैन्य टुकड़ी में ब्रिगेडियर की भूमिका निभाई थी। इतिहास बताता है कि उन्होंने 18 पाउंडर तोपों को दुर्गम पहाड़ी रास्तों से ऊपर तक पहुंचाया,था। इस मार्च को बंगाल आर्टिलिरी के लिए चिरस्थायी गौरव कहा गया। ब्रिगेडियर व्हीलर के नेतृत्व में बिना रक्तपात के कांगड़ा किले पर कब्जा हुआ और सतलुज अभियान सम्पन्न हुआ था।
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