सोशल मीडिया की ताकत ने बना दिया ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’, एक फेसबुक पोस्ट, जिसने सिस्टम की आंखें खोल दीं
सोशल मीडिया की ताकत ने बना दिया ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’, एक फेसबुक पोस्ट, जिसने सिस्टम की आंखें खोल दीं
विनोद भावुक। शिमला
कभी-कभी व्यवस्था को जगाने के लिए न आदेश चाहिए, न आंदोलन, बस एक संवेदनशील आवाज़ काफी होती है। हिमाचल प्रदेश के लोक संपर्क विभाग, शिमला में तैनात सहायक जन संपर्क अधिकारी अजय बनयाल की एक फेसबुक पोस्ट ने यही कर दिखाया। सोशल मीडिया की ताकत ने चंबा जिले की एक दूर-दराज पंचायत के चार बेसहारा बच्चों को वह पहचान दिलाई, जिसका वे वर्षों से इंतज़ार कर रहे थे। वे बच्चे मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के तहत ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ बन गए।
एक पोस्ट और हरकत में आया सिस्टम
जिला चंबा की ग्राम पंचायत भजोत्रा के गांव मटवाड़ के चार बच्चे, जो वर्षों से सुविधाओं से वंचित थे,
अब मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के तहत शामिल किए जा रहे हैं। जिला बाल कल्याण समिति ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इनमें से दो बच्चों को प्रति माह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता भी मिलेगी। यह सिर्फ मदद नहीं, बल्कि उनके भविष्य को संवारने की ठोस शुरुआत है।
सवाल जो सिस्टम से पूछे जाने चाहिए
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने सालों तक ये बच्चे नजरों से ओझल कैसे रहे? जिनकी जिम्मेदारी थी, वे मौन क्यों रहे? न रिकॉर्ड, न पहल, न संवेदनशीलता। अगर यह मामला सोशल मीडिया और मीडिया तक न पहुंचता, तो न कागजी कार्रवाई होती, न इन बच्चों को कोई सहारा मिलता।
‘सुखाश्रय’ उम्मीद की सबसे मजबूत ढाल
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की शुरू की गई सुखाश्रय योजना हिमाचल ओरदेश के हजारों निराश्रित बच्चों के लिए जीवनरेखा बन चुकी है। ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्ज़ा देकर राज्य सरकार ने यह साफ कर दिया है कि अब कोई बच्चा बेसहारा नहीं रहेगा।
जब संवेदनशीलता बनी बदलाव की वजह
हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए फेसबुक पर लिखा कि इस विषय को संज्ञान में लाने के लिए वे अनुपमा शर्मा और संवेदनशील पोस्ट के लिए अजय बनयाल की आभारी हैं।
ज्ञान वही सार्थक, जो जीवन में भर दे उजाला
यह कहानी सिर्फ चार बच्चों की नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी की है जो हम सभी की है। अगर आपके आसपास भी कोई बच्चा सरकारी योजनाओं से वंचित है, तो उसे प्रशासन तक पहुंचाना हम सबका नैतिक दायित्व है। ज्ञान वही सार्थक है, जो किसी और के जीवन में उजाला भर दे। जागरूक नागरिक बनिए, ज़िम्मेदार इंसान बनिए।
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