शिमला के जाखू हिल पर था रूसी राजकुमार का आशियाना, यूरोप में ‘द इंडियन’ नाम से मशहूर थे साल्तिकोव
शिमला के जाखू हिल पर था रूसी राजकुमार का आशियाना, यूरोप में ‘द इंडियन’ नाम से मशहूर थे साल्तिकोव
विनोद भावुक। शिमला
शिमला की जाखू पहाड़ी को पुरातन हनुमान मंदिर, देवदार के जंगल और धुंध में लिपटी वादियों के लिए जाना जाता है, लेकिन कभी इसी पहाड़ी पर एक रूसी राजकुमार ने अपना घर बनाया था। उन्नीसवीं सदी के मध्य में, जब शिमला अभी पूरी तरह औपनिवेशिक राजधानी भी नहीं बना था, तब इसी पहाड़ी पर एक रूसी राजकुमार, कलाकार एवं लेखक प्रिंस एलेक्सी साल्तिकोव (अलेक्सेई दिमित्रियेविच) का निवास था।
1840 के दशक में साल्तिकोव ने भारत की दो लंबी यात्राएँ कीं। इन्हीं यात्राओं के दौरान उन्होंने जाखू हिल पर एक मकान बनाया। समकालीन अंग्रेज कलाकार मिसेज डब्ल्यू एल एल स्कॉट के बनाए एक स्केच में यह घर आज भी पहचाना जा सकता है। 2013 में प्रकाशित अमृत्य मुखोपाध्याय की पुस्तक ‘ इंडिया इन रसियन ओरिएंटलिज्म’ के मुताबिक साल्तिकोव भारत को जीतने नहीं, भारत को समझने आए थे।
स्केचबुक्स और किताबों से पाई शोहरत
जाखू से ही साल्तिकोव ने पंजाब, दिल्ली, ग्वालियर, कलकता और दक्षिण भारत की यात्राओं की योजना बनाई। शिमला उनके लिए ठहराव भर नहीं था। यह उनका रचनात्मक आश्रय था। यूरोप में साल्तिकोव को ‘द इंडियन’ के नाम से जाना गया। उनकी इस पहचान की वजह थीं उनकी स्केचबुक्स, जिसमें सिख सरदारों की घुड़सवार टोलियां, अमृतसर के निकट महाराजा शेर सिंह के दृश्य, मेलों, मंदिरों और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी उकेरी थी।
उनके बनाए चित्रों में औपनिवेशिक दंभ नहीं था, बल्कि हैरानी, सम्मान और मानवीय जिज्ञासा थी। शिमला, उनके लिए अंग्रेजी सत्ता और भारतीय समाज के बीच एक मौन सेतु बन गया। भारत और शिमला में बिताया गया समय उनकी किताबों में साफ़ झलकता है।1848 में प्रकाशित साल्तिकोव की चर्चित पुस्तक ‘Lettres sur l’Inde’ (भारत से पत्र) ने फ्रांस के बौद्धिक जगत में हलचल मचा दी थी।
176 साल बाद भी ड्रॉइंग्स और शब्दों में जीवंत
साल्तिकोव ने ‘Habitants de l’Inde’ और ‘Voyages dans l’Inde et en Perse’ किताबें भी लिखीं। 1851 में जब ये रूसी भाषा में प्रकाशित हुईं, तो बेस्टसेलर बन गईं। रूस के पाठकों ने पहली बार भारत को एक कलाकार की आंखों से देखा। शिमला का इतिहास अक्सर अंग्रेज अफ़सरों, वायसराय और स्वतंत्रता आंदोलन तक सिमट जाता है, पर साल्तिकोव याद दिलाते हैं कि यह शहर वैश्विक सांस्कृतिक यात्रियों का भी ठिकाना था।
उनसे जुड़ी ड्रॉइंग्स और वस्तुएँ ब्रिटिश म्यूज़ियम, विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूज़ियम और हर्मिटाज म्यूज़ियम रूस में आज भी सुरक्षित हैं। जाखू हिल पर रची गईं कृतियां दुनिया के महान संग्रहालयों तक पहुंची। 1859 में पेरिस में साल्तिकोव का निधन हो गया, लेकिन शिमला में बिताया गया उनका समय 176 साल बाद भी वे ड्रॉइंग्स और शब्दों में जीवित हैं।
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