कला को संरक्षण देने वाले वैज्ञानिक की कहानी, कांगड़ा व अमृतसर के गवर्नर सरदार लेहना सिंह मजीठिया ने किया था धूप से चलने वाली घड़ी का आविष्कार
कला को संरक्षण देने वाले वैज्ञानिक की कहानी, कांगड़ा व अमृतसर के गवर्नर सरदार लेहना सिंह मजीठिया ने किया था धूप से चलने वाली घड़ी का आविष्कार
विनोद भावुक। कांगड़ा
सिख साम्राज्य के समय के बहुआयामी व्यक्तित्व सरदार लहना सिंह मजीठिया (1854) ने कांगड़ा और अमृतसर में प्रशासन संभालते हुए विज्ञान, कला, स्थापत्य, इंजीनियरिंग और नवाचार में अपना अमूल्य योगदान दिया। वे देसा सिंह मजीठिया के सबसे बड़े पुत्र थे और महाराजा रणजीत सिंह के दरबार में उन्हें सबसे बुद्धिमान, सुसंस्कृत और दूरदर्शी प्रशासक माना जाता था।
1832 में पिता के निधन के बाद लहना सिंह ने कांगड़ा और अमृतसर के गवर्नर के रूप में प्रशासन संभाला। उन्होंने स्वर्ण मंदिर अमृतसर के नवीनीकरण के साथ उसके चारों ओर बगीचों तथा संगमरमर की परिक्रमा मार्ग का निर्माण किया। कांगड़ा में प्रशासनिक सुधार, भूमि प्रबंधन और सांस्कृतिक संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्हें न्यायप्रिय और दूरदर्शी प्रशासन के लिए उच्च सम्मान मिला।
धूप से चलती थी घड़ी, सिख कैलेंडर में सुधार
2005 में द ट्रिब्यून में प्रकाशित वरिन्द्र वालिया अपने आलेख, ‘ ए गोल्डन लीफ द अन्नल्स ऑफ सीख हिस्टरी- सरदार लहना सिंह मजीठिया’ में लिखते हैं कि लहना सिंह मजीठिया एक महान वैज्ञानिक थे। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, वे साइंटिस्ट, इंजीनियर और आविष्कारक थे। उन्होंने धूप से चलने वाली घड़ी का निर्माण किया, जो समय, तिथि, सप्ताह का दिन, चंद्रमा की अवस्था और तारामंडल दिखाती थी।
वरिन्द्र वालिया लिखते हैं कि महाराजा रणजीत सिंह की इच्छा पर लहना सिंह मजीठिया ने सिख कैलेंडर में सुधार किया। इतना ही नहीं, सिख सेना को ताकतवर बनाने के लिए उन्होंने आधुनिक हथियार बनाने के लिए कई प्रयोग किए और यूरोपीय तकनीक से बंदूकें व तोपें तैयार कर ब्रिटिश सेनाओं की तुलना में सिख सेना के लिए श्रेष्ठ हथियार बनवाए।
वैज्ञानिक ने दिया कला को संरक्षण
लहना सिंह मजीठिया ने कांगड़ा और पंजाब हिल्स के कलाकारों को संरक्षण दिया। कांगड़ा शैली की मिनिएचर पेंटिंग्स और स्थापत्य कार्यों का विकास किया। रणजीत सिंह के गर्मी के महल राम बाग के निर्माण और नवीनीकरण में भी सहयोग किया। उन्होंने सिर्फ प्रशासन ही नहीं चलाया, विज्ञान, कला और संस्कृति के संरक्षण में भी खास भूमिका निभाई।
लेपल हेनरी ग्रिफ़िन ने 1890 में, ‘द पंजाब चीफ़्स, सिविल एंड मिलिटरी गेजेट’ में उल्लेख किया है कि
लहना सिंह मजीठिया ने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए खूब काम किया। ज्ञान, नेतृत्व और नवाचार उनके जीवन के प्रमुख स्तंभ थे, जिसके चलते वे सिख राज के बुद्धिमान, सुसंस्कृत और दूरदर्शी प्रशासक थे।
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