किताब के बहाने फिर जिंदा हुआ शिमला की भूतों की हवेली का किस्सा, साहिल शर्मा की पुस्तक Charleville Mansion — The Haunted Car in Shimla Hills ने ताज़ा की यादें
किताब के बहाने फिर जिंदा हुआ शिमला की भूतों की हवेली का किस्सा, साहिल शर्मा की पुस्तक Charleville Mansion — The Haunted Car in Shimla Hills ने ताज़ा की यादें
विनोद भावुक। शिमला
लेखक साहिल शर्मा की पुस्तक Charleville Mansion — The Haunted Car in Shimla Hills ने शिमला की भूतों की हवेली का किस्सा और और उसकी यादें ताज़ा कर दी हैं। 2021 में अंग्रेजी में प्रकाशित पुस्तक पाठकों को सीधे शिमला की इस हवेली की कहानी, माहौल और असीमित रहस्य के बीच ले जाती है। शुरुआती पन्नों में ही लेखक एक डरावनी आवाज़ का वर्णन करते हैं जो उन्होंने हवेली की खामोशी में सुना। एक ऐसी आवाज़ जो बारिश जैसा प्रतीत हुआ, पर असल में कोई बारिश नहीं थी।
शिमला के शिखर पर बुने गए कोलोनियल-काल के भव्य घरों में Charleville Mansion अपनी रहस्यमयी पहचान के लिए सदियों से चर्चा में है। इस हवेली की स्थापत्य कला और इसके चारों ओर घूमती भूत-प्रेत की कथाएं लोगों को आकर्षित करती हैं। 1913 में ब्रिटिश अधिकारी विक्टर बेली ने इसे किराए पर लिया था, पर बहुत कम समय के बाद ही बेली दम्पति ने इस घर को खाली कर दिया, क्योंकि रात के समय अजीब सी गतिविधियां और रहस्यमयी अनुभव होने लगे थे।
भूतों की रहस्य कथा, हवा में करवटें उठता डर
लोकमानस में शिमला की यह हवेली सबसे भुतहा स्थल कही जाती है। लोगों का कहना है कि रात में हवेली के भीतर अनसुने आवाज़ें आती हैं। कभी-कभी पैरों की आवाज़ें, दरवाज़ों का खुलना-बंद होना सुनाई देता है। कुछ लोग तो एक सफ़ेद या मिलिट्री ड्रेस पहने आत्मा-सी आकृति तक देखने का दावा भी करते हैं! एक लोक कथा के अनुसार ब्रिटिश अधिकारी कैप्टन चार्ल्स प्रैट की आत्मा हवेली में भटकती है, जिस वजह से कई लोगों को वहां डरावना लगता है।
शिमला की Charleville Mansion, जो आज भी इतिहास प्रेमियों और रहस्य खोजने वालों को आकर्षित करती है। एक मशहूर लोककथा के अनुसार, विक्टर बेली ने अफवाहों की सच्चाई परखने के लिए ऊपर के एक कमरे को बंद कर दिया था, लेकिन अगली सुबह जब वह कमरा खोला गया, तो वह पूरी तरह तहस-नहस था। फर्नीचर बिखरा हुआ, सामान टूटा हुआ और किसी तरह की जबरन घुसपैठ के कोई निशान नहीं।
शिमला खींच लाती है बंद हवेली
1947 में भारत की आज़ादी के बाद यह संपत्ति ब्रिटिश हाथों से निकलकर भारतीय निजी स्वामित्व में आ गई, लेकिन आने वाले दशकों में Charleville Mansion ज़्यादातर खाली और उपेक्षित ही रही। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हवेली लंबे समय तक वीरान पड़ी रही और धीरे-धीरे जर्जर होती चली गई। हालांकि हाल के वर्षों में इसे एक भारतीय मालिक ने मूल शैली को बनाए रखते हुए नवीनीकरण किया गया है, लेकिन यह आज भी यह हवेली आम लोगों के लिए लगभग बंद ही रहती है।
सोचने वाली बात यह है कि शिमला के Charleville Mansion जैसी हवेलियों की कहानियां सिर्फ कल्पना हैं या वास्तव में वहां कुछ अनकहे अनुभव व ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं? मकान की पुरानी लकड़ी, बारिश की आवाज़, खामोश कमरे, सब मिलकर एक मनोरंजक और डरावना एहसास देते हैं, जो इतिहास प्रेमियों, रहस्य और साहसिक पाठकों और शिमला के पर्यटकों को जहां इतिहास और डर साथ-साथ चलते हैं, उस तरफ़ खींच लाते हैं।
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