साहस के साथ संवेदना से हिमालय की दुर्गम घाटियों का कड़वा सच लिखने वाली अंग्रेज़ लेखिका, लाहौल से जुड़ी एलेनोर बोर की अनकही कहानी
साहस के साथ संवेदना से हिमालय की दुर्गम घाटियों का कड़वा सच लिखने वाली अंग्रेज़ लेखिका, लाहौल से जुड़ी एलेनोर बोर की अनकही कहानी
विनोद भावुक। केलंग
देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक रहे ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक नॉर्मन बोर की पत्नी एलेनोर कोन्स्टेंस रंडल बोर एक साहसी लेखिका, चित्रकार और अन्वेषक थी, जिनकी ज़िंदगी हिमालय से गहराई से जुड़ गई। उन्होंने अपने पति के साथ पश्चिमी और पूर्वोत्तर हिमालय के दुर्गम इलाक़ों में का वनस्पति अभियानों में भाग लिया और उन्हें अपने संस्मरणों में कैद कर लिया।
1931 में एलेनोर इंग्लैंड से भारत आईं और आयरिश वनस्पति वैज्ञानिक नॉर्मन बोर से विवाह किया। 1930–40 के दशक में उन्होंने जोखिम भरे अभियानों में भाग और प्रसिद्ध पुस्तक ‘The Adventures of a Botanist’s Wife’ में लिखी। 1952 में ऑस्ट्रेलिया के ‘Melbourne’ अख़बार ने उनकी पुस्तक पर ‘On Top of the World’ शीर्ष से लेख छापा, जिसने एलेनोर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
रोमांच से ज्यादा जीवटता की परीक्षा
14 फरवरी 1897 को जन्मी एलेनोर बोर बेशक वनस्पति वैज्ञानिक की पत्नी थी, लेकिन खुद एक असाधारण यात्री और शानदार लेखिका थी। हिमालय की बर्फ़ीली चोटियां, खतरनाक पहाड़ी रास्ते, झूलते केन-ब्रिज और अनजान जंगल, इन सबके बीच सैंड शूज़ पहनकर वह मुस्कुराती हुई आगे बढ़ती थी। एलेनोर की असली यात्रा जोखिम और रोमांच से भरपूर थी।
लाहौल-स्पीति की यात्रा के बारे में एलेनोर अपने संस्मरण में लिखती हैं कि सैकड़ों फीट नीचे उफनती नदियों के ऊपर मकड़ी के जाले जैसे केन-ब्रिज, बर्फ़ और धुंध से निकलकर अचानक दिखते बुरान्स और मंगनोलिया के लाल-सफेद जंगल। रात को जलती आग, जंगलों में डर पैदा करने वाले जोंक, जंगली जानवर, कीड़े -मक्खियां, ये अनुभव केवल रोमांच से ज्यादा जीवटता की परीक्षा थे।
साहस के साथ संवेदना का संतुलन
एलेनोर की पुस्तक, ‘The Adventures of a Botanist’s Wife’ उनके हिमालय में बिताए सालों का दस्तावेज़ है। इस पुस्तक में में लाहौल जैसे जनजातीय क्षेत्रों का जीवन केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि मानवीय रूप में सामने आता है। एक स्त्री की स्वतंत्र दृष्टि से हिमालय पर लिखी इस पुस्तक में पहाड़ी जनजातियों से दोस्ती, कठिन जीवन के बीच घरेलू परेशानियां, पालतू जानवरों के किस्से शामिल हैं।
एलेनोर बोर लाहौल की निवासी नहीं थीं, लेकिन उनकी नज़र ने इस हिमालयी भूभाग को केवल ‘खोज का इलाक़ा’ नहीं, बल्कि जीवन से भरी एक सभ्यता के रूप में दर्ज किया। आज जब लाहौल-स्पीति पर्यटन, शोध और पर्यावरणीय बहसों के केंद्र में है, तो एलेनोर बोर की लेखनी हमें याद दिलाती है कि हिमालय को समझने के लिए साहस के साथ संवेदना भी ज़रूरी है।
सुंदर फूल ने नहीं, ‘घास’ ने किया अमर
एलेनोर बोर को उम्मीद थी कि उनके नाम पर किसी दुर्लभ ‘ऑर्किड’ का नाम रखा जाएगा। आर्किड वनस्पति जगत का अति सुंदर फूल होता है, जो अदभुत रंग-रूप, आकार एवं आकृति के साथ लंबे समय तक तरो-ताजा रहता है। भारत में आर्किड की लगभग 1300 प्रजातियां पाई जाती हैं। उत्तर पूर्व हिमालय 600 और उत्तर-पश्चिम हिमालय में 300 प्रजातियां मिलती हैं।
एलेनोर बोर के पति घासों के विशेषज्ञ थे। आख़िरकार एलेनोर बोर के नाम पर एक अत्यंत दुर्लभ घास की प्रजाति का नाम रखा गया। इस पर एलेनोर बोर ने मज़ाक में अपने संस्मरण में लिखा। ‘मैं उन्हें मरे हुए फर का एक बेतरतीब टुकड़े जैसी लगती थी। ऐसा आत्म-व्यंग्य और सरलता उनकी लेखनी की ताक़त बनी।
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