सीबा के महलों और मंदिरों की दीवारों पर गुलेर के चितेरों के हुनर के रंग
सीबा के महलों और मंदिरों की दीवारों पर गुलेर के चितेरों के हुनर के रंग
हिमाचल बिजनेस स्पेशल । कांगड़ा
पहाड़ी सीबा रियासत केवल शौर्य और राजसी वैभव के साथ अपनी अनमोल चित्रकला विरासत के लिए भी जानी जाती है। जब पड़ोसी रियासत गुलेर में पहाड़ी लघु चित्रकला अपने उत्कर्ष पर थी, तब सीबा के शासक भी इस कला से प्रभावित हुए। राजा शेर सिंह ने गुलेर से प्रसिद्ध चितेरों को दरबार में बुलाया। उनकी चित्रकारी के साक्ष्य आज भी सीबा के किलों और महलों की दीवारों पर देखे जा सकते हैं।
राजा गोबिंद सिंह जी का एक अत्यंत सुंदर पोट्रेट सीबैइया राजपरिवार के अभिलेखों में सुरक्षित है, जबकि इसकी एक प्रति हरिद्वार में भी स्थापित है। राजा राम सिंह और राजा सुंदर सिंह के लिए बनाए गए महलों की दीवारों पर भी मनोहारी चित्रकारी करवाई गई। राधा-कृष्ण मंदिर की भक्ति, प्रेम और पहाड़ी जीवन की झलक वाली भित्ति-चित्रकला आज भी सैलानियों को आकर्षित करती है।

लुप्तप्राय विरासत को पुनर्जीवित करने की पहल
समय के साथ जब रियासतें युद्धों और राजनीतिक चुनौतियों में उलझीं, तो सीबा में चित्रकला का रुझान धीरे-धीरे कम होता गया। राजा राम सिंह और राजा सुंदर सिंह की व्यस्तताओं के कारण पहाड़ी लघु चित्रकला की समृद्ध परंपरा का हिस्सा और सांस्कृतिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज सीबा की लघु चित्रकला लगभग लुप्तप्राय हो गई।
सीबा रियासत के राजा डॉ. अशोक कुमार ठाकुर कहते हैं कि गुलेर चित्रशैली के संरक्षण में सक्रिय कंवर साहिब राघव गुलेरिया की प्रेरणा से सीबा में इस लुप्त होती कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। रॉयल हाउस ऑफ सीबा स्टेट और टटंपलां की ओर से इस सांस्कृतिक धरोहर को फिर से जीवंत बनाने का संकल्प लिया गया है।

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