शिमला में कई ऐतिहासिक फैसले लेने वाले भारत के वाइसराय लॉर्ड कर्ज़न की बेटियों के जीवन के अंधेरों और उजालों की पड़ताल

शिमला में कई ऐतिहासिक फैसले लेने वाले भारत के वाइसराय लॉर्ड कर्ज़न की बेटियों के जीवन के अंधेरों और उजालों की पड़ताल
शिमला में कई ऐतिहासिक फैसले लेने वाले भारत के वाइसराय लॉर्ड कर्ज़न की बेटियों के जीवन के अंधेरों और उजालों की पड़ताल
विनोद भावुक। शिमला
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के वाइसराय लॉर्ड कर्ज़न की तीन बेटियां आइरीन, सिंथिया (सिम्मी) और एलेक्जेंड्रा (बाबा) केवल धनी परिवार की सदस्य नहीं थीं; वे 1920 और 1930 के दशक के राजनीतिक और सामाजिक उतार-चढ़ाव का भी हिस्सा रहीं। उनकी ज़िंदगियां उच्च वर्ग की शोहरत और आलीशान जीवनशैली के साथ ब्रिटिश राजनीति, युद्ध के समय की चुनौतियों और विश्व इतिहास से जुड़ी परतों को भी उजागर करती हैं।
1899 से 1905 तक वे ब्रिटिश भारत के वाइसराय रहे। गर्मियों में जब राजधानी शिमला आ जाती तो वाइसराय लॉर्ड कर्ज़न अपने परिवार सहित शिमला आते थे। ऐनी डी कौरसी ने ‘The Viceroy’s Daughters’ पुस्तक में उनकी तीनों बेटियों की ज़िंदगियाँ, सामाजिक चमक-दमक, प्यार और रिश्तों की जटिलताएँ, युद्धकालीन चुनौतियाँ, और उच्च राजनीति के समीप की घटनाएं जीवंत रूप से पेश की हैं।
तीन बहनों के जीवन की कहानी
आइरीन सबसे बड़ी बेटी, संगीत-प्रेमी और उत्साही फॉक्स हंटर थी। उसने पारिवारिक दबावों को हराकर अपने तरीके से जीवन जिया और बाद में क्लबों के काम के लिए युवाओं के लिए लाइफ पियर बन गई।
सिंथिया (सिम्मी) राजनीति में सक्रिय रही और सांसद बनी, लेकिन विवाह ने उसे अचानक फासीवादी नेता ओसवाल्ड मोसली से जोड़ा, जो बाद में उसके जीवन का सबसे मुश्किल अनुभव बन गया।
एलेक्जेंड्रा (बाबा) सबसे खूबसूरत, लेकिन सबसे अधिक जटिल ज़िंदगी वाली बहन, जिसने प्रभावशाली पुरुषों के साथ रिश्तों और रोमांच के कई क़िस्से रचे। ये तीनों बहनें न केवल ब्रिटिश उच्च समाज के सामाजिक जीवन का हिस्सा रहीं, बल्कि उन्होंने कई ऐतिहासिक राजनीतिक मोड़ों का भी निकटता से अनुभव किया।
इसलिए खास है पुस्तक
इस पुस्तक में अनदेखे डायरी और पत्रों के ज़रिये तीन बहनों की कहानी को आत्मीयता और ऐतिहासिक संदर्भ दोनों में लिखा गया है, जिससे हमारा इतिहास और अधिक मानवीय, रंगीन और दिलचस्प बनता है। यह केवल एक पारिवारिक कथा नहीं, बल्कि एक सदी पहले की विश्व-राजनीति, समाज और संस्कृति का दिलचस्प अध्याय है, जहाँ प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत निर्णय आपस में उलझे हुए हैं।
वाइसराय लॉर्ड कर्ज़न के लिए शिमला केवल एक ग्रीष्मकालीन राजधानी नहीं था। उनके प्रशासन, शिक्षा सुधारों और व्यक्तिगत पसंद का एक महत्वपूर्ण केंद्र था, जहाँ उन्होंने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए और अपने प्रभाव की छाप छोड़ी। यह पुस्तक उसी लॉर्ड कर्ज़न की तीनों बेटियों के जीवन के हर पक्ष की बारीक पड़ताल करती है।
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Jyoti maurya

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