कांगड़ा में तीन हजार किशोरियां कर रहीं पढ़ाई, घर-समाज में लड़ेगी महिलाओं के हक की लड़ाई
कांगड़ा में तीन हजार किशोरियां कर रहीं पढ़ाई, घर-समाज में लड़ेगी महिलाओं के हक की लड़ाई
विनोद भावुक। धर्मशाला
गैर सरकारी संस्था ‘जगोरी रूरल’ कांगड़ा जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में कई सशक्तिकरण कार्यक्रम चला रही है, जिनमें लगभग 3,000 किशोर लड़कियों को विशेष कार्य के प्रशिक्षित किया जा रहा है। भविष्य में ये लड़कियां परिवार और समुदाय में लिंग आधारित हिंसा, भूमि और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का सामाजिक आंदोलन खड़ा करेंगी।
पिछले 50 वर्षों से लिंग असमानता और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहीं देश की जानी-मानी फेमिनिस्ट एक्टिविस्ट आभा भैया के विशेष प्रयासों से कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला के पास स्थित रक्कड़ गाँव स्थित जगोरी रूरल संस्थान महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी लिख रहा है। साल 2003 में 10 लड़कियों के साथ शुरू हुआ जगोरी संस्थान कांगड़ा के 350 गांवों में सक्रिय है।
न्याय सखी पढ़ाएगी कानून का पाठ
जगोरी रूरल संस्था स्थानीय महिलाओं को न्याय सखी के रूप में प्रशिक्षित कर रही है, जो अन्य महिलाओं के लिए कानूनी मदद कर सकती हैं। शुरू में संस्था ने लड़कियों को स्कूल लौटने और फेमिनिस्ट एक्टिविज़्म में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। आज इनमें से कई लड़कियों ने मास्टर्स तक की पढ़ाई पूरी की है।
जगोरी स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करती है, जहाँ महिलाओं और लड़कियों को उनके शरीर, प्रजनन प्रणाली और हक़ के बारे में जानकारी दी जाती है। जगोरी जैविक खेती और सतत जीवनशैली को बढ़ावा दे रही है। वे ‘निष्ठा’ संस्था की संस्थापक बोर्ड सदस्य हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए कांगड़ा जिला में ‘निष्ठा’ महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।
‘धौलाधार की तलहटी में ‘तारा’
ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाली महिलाओं की सशक्तिकरण आभा भैया की प्राथमिकता रही है। उन्होंने ‘धौलाधार की तलहटी में स्थित तारा’ नामक फेमिनिस्ट रिट्रीट की स्थापना की है, जो महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ और अल्टरनेटिव हीलिंग सत्र प्रदान करता है। लक्ष्य साफ है महिलाओं के छोटे समूहों को सशक्त बनाना और सामूहिक नेतृत्व को बढ़ावा देना।
आभा भैया महिलाओं की आंदोलन और सशक्तिकरण की दुनिया में पिछले 50 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने न केवल आंदोलन को आकार दिया, बल्कि खुद भी इस आंदोलन से प्रेरित और परिपक्व हुईं। उनकी प्रेरक कहानी महिलाओं के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों, स्वास्थ्य, लिंग, जीवनशैली, भोजन सुरक्षा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ी हुई है।
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