‘पर्यटन’ संग ‘उपहार’ : पर्यटन के साथ अब ‘मशरूम चॉकलेट’ के साथ होगी शिमला की पहचान, ओडीओपी में शामिल करने के लिए दिल्ली भेजा प्रस्ताव
‘पर्यटन’ संग ‘उपहार’ : पर्यटन के साथ अब ‘मशरूम चॉकलेट’ के साथ होगी शिमला की पहचान, ओडीओपी में शामिल करने के लिए दिल्ली भेजा प्रस्ताव
विनोद भावुक। शिमला
पहाड़ों की रानी शिमला पर्यटन राजधानी के साथ अब अपनी पहचान को एक नई दिशा देने जा रही है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) के अंतर्गत शिमला जिले के लिए औषधीय मशरूम से बनी चॉकलेट के नए और नवाचारपूर्ण उत्पाद को शामिल करने का प्रस्ताव प्रदेश के उद्योग विभाग ने भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को भेजा है।
शिमला की एक नवाचारशील इकाई ‘टेस्ट एंड हील’ इस प्रस्ताव के केंद्र में है, जिसने स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले औषधीय मशरूम से चॉकलेट तैयार की है। ये मशरूम खास तौर पर जनजातीय और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उगाए जाते हैं, जिनका उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक और औषधीय परंपराओं में होता रहा है। ‘टेस्ट एंड हील’ अब इससे चॉकलेट बना रही है।
‘पर्यटन’ संग ‘उपहार’ की संस्कृति
फिलहाल शिमला जिले का ओडीओपी उत्पाद ‘पर्यटन’ है, लेकिन उद्योग विभाग ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि मशरूम-बेस्ड चॉकलेट को शिमला का ‘ दूसरा ओडीओपी उत्पाद’ घोषित किया जाए। पहाड़ी उत्पादों में दुर्लभ, वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त श्रेणी और निर्यात में आसानी जैसे इसके पीछे ठोस और व्यावहारिक कारण हैं।
यह चॉकलेट इसलिए खास है कि इसकी शेल्फ लाइफ 9 से12 महीने की है। इसके लिए कोल्ड चेन की जरूरत नहीं है। पर्यटकों के लिए यह प्रीमियम सॉवेनियर और राज्य के गिफ्ट हैम्पर व ओड़ीओपी बुटीक के लिए उपयुक्त है। त्योहार, कॉर्पोरेट गिफ्टिंग व ट्रैवल रिटेल में साल भर इसकी मांग रहेगी और यह शिमला जिले को निर्यात हब के तौर पर विकसित करने की सोच को मजबूती देता है।
हेल्थ चॉकलेट फ्रॉम हिमालयाज़’
शिमला जैसे पर्यटन-प्रधान जिले के लिए यह मॉडल स्थानीय किसानों। मशरूम उत्पादकों, युवाओं और महिला उद्यमियों सभी के लिए रोज़गार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोल सकता है। प्रस्ताव स्वीकार होने की सूरत में आने वाले समय में शिमला सिर्फ़ मॉल रोड और रिज के लिए नहीं, हेल्थ चॉकलेट फ्रॉम हिमालयाज़’ के लिए भी जाना जाएगा।
यह पहल दिखाती है कि कैसे पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक मार्केटिंग और सरकारी नीति मिलकर पहाड़ की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दे सकती है। उद्योग निदेशक डॉ युनूस ने इस प्रस्ताव के भेजे जाने की पुष्टि करते हुये बताया कि उद्योग विभाग ने भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को इस संदर्भ में आधिकारिक पत्र भेजा है।
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