अनकही कहानी : शिमला की रामलीला की ‘सीता’ और मुंबई के बॉलीवुड का ‘महा खलनायक’

अनकही कहानी : शिमला की रामलीला की ‘सीता’ और मुंबई के बॉलीवुड का ‘महा खलनायक’
अनकही कहानी : शिमला की रामलीला की ‘सीता’ और मुंबई के बॉलीवुड का ‘महा खलनायक’
विनोद भावुक। शिमला
हिंदी सिनेमा के इतिहास में अगर खलनायकी की बात हो और प्राण नाम न आए तो कहानी अधूरी लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्मों के इस ‘महाखलनायक’ ने अपने अभिनय सफर की शुरुआत शिमला की रामलीला से की थी और वह भी सीता के किरदार से? यह तथ्य न केवल रोचक है, बल्कि यह भी बताता है कि अभिनय के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा था।
ब्रिटिशकाल में शिमला सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। यहीं स्थानीय रामलीला में युवा प्राण ने ‘सीता’ की भूमिका निभाई थी, जबकि ‘राम’ बने थे उनके समकालीन अभिनेता मदन पुरी। कई तस्वीरों में उनके नाम के आगे ‘कुमारी प्राण’ लिखा मिलता है, जो उस दौर की परंपरा के अनुसार महिला भूमिका निभाने वाले पुरुष कलाकारों के लिए इस्तेमाल होता था।
खलनायक से चरित्र अभिनेता तक
शिमला की मंचीय प्रस्तुतियों से शुरू हुआ सफर मुंबई तक पहुंचा। 1940 के दशक से लेकर 1990 तक उन्होंने 350 से अधिक फिल्मों में काम किया। ‘उपकार’ में मलंग चाचा, ‘जंजीर’ में शेर खान ‘पूरब और पश्चिम’ का ‘डॉन’, उनकी आवाज़, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेज़ेंस ने उन्हें अमर बना दिया। 2020 में उनकी जन्म शताब्दी मनाई गई। इस अवसर पर परिवार ने पुरानी यादों को साझा किया।
शिमला की रामलीला से लेकर भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार तक का सफर प्रेरणादायक है। प्राण की कहानी यह सिखाती है कि शुरुआत चाहे कितनी भी साधारण क्यों न हो। यदि जुनून और समर्पण हो, तो व्यक्ति इतिहास रच सकता है। शिमला की छोटी-सी रामलीला से निकला एक छोटा सा कलाकार भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित चेहरा बन गया।
हंसमुख और मज़ाकिया युवक
कहानी यहीं खत्म नहीं होती। परिवार के एल्बम से उनके बेटे सुनील सिकंदर द्वारा जारी एक दुर्लभ तस्वीर में दिखता है कि अपने बड़े भाई की शादी में प्राण ने नवविवाहित भाभी को चौंकाने के लिए खुद को भाई की ‘प्रेमिका’ के रूप में प्रस्तुत किया। यह शरारत बताती है कि पर्दे पर गंभीर दिखने वाले प्राण असल जिंदगी में बेहद हंसमुख और मज़ाकिया स्वभाव के थे।
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Jyoti maurya

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