वैद्य तिहडू राम : चंगर की नब्ज पहचानने वाले महान चिकित्सक, याद में सरकार ने बनाया स्मृति भवन
वैद्य तिहडू राम : चंगर की नब्ज पहचानने वाले महान चिकित्सक, याद में सरकार ने बनाया स्मृति भवन
विनोद भावुक। बाबा बड़ोह
वो दौर था जब सड़कों की जगह संकरे जंगलों के पगडंडी रास्ते थे, न अस्पताल थे, न दवाखाने। बस जड़ी-बूटियों की खुशबू और एक नाम वैद्य तिहडू राम। नगरोटा बगवां के बाबा बड़ोह में जन्मे इस विलक्षण वैद्य ने चंगर की मिट्टी में स्वास्थ्य की संजीवनी घोल दी थी।
वे केवल वैद्य नहीं, बल्कि लोगों के लिए जीवित भगवान थे। वे सिर्फ वैद्य नहीं थे, एक संस्था थे, जिनकी दवा में प्रकृति, और न्याय में भगवान बसते थे। चंगर के विकास पुरुष के तौर पर उनका रुतबा आज भी कायम है।
जड़ी-बूटियों के ज्ञाता, प्रकृति के साधक
1918 में जन्मे वैद्य तिहडू राम ने किशोरावस्था में ही जड़ी-बूटियों की पहचान और औषध निर्माण की विद्या सीख ली थी। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि वे पैदल आदि हिमानी चामुंडा की पहाड़ियों तक जाते थे, दिव्य जड़ी-बूटियाँ एकत्र करते और उनसे चमत्कारी दवाएँ बनाते।
उनकी बनाई औषधियाँ इतनी प्रभावशाली थीं कि दूर-दूर से मरीज उनके घर इलाज के लिए आते थे और निराश नहीं लौटते थे। कहते हैं, वैद्य जी के स्पर्श में ही उपचार था।
न्यायप्रियता और सामाजिक सुधार की मिसाल
वैद्य तिहडू राम की लोकप्रियता का कारण केवल उनकी चिकित्सीय प्रतिभा नहीं, बल्कि उनकी न्यायप्रियता भी थी। अगर किसी विवाद में दोषी उनका अपना परिजन भी होता, तो वे बिना झिझक सजा सुनाते। उनके फैसले पत्थर की लकीर माने जाते थे, जिन्हें सब सम्मान से स्वीकार करते थे।
वे सिर्फ वैद्य नहीं, वे सामाजिक सुधारक भी थे। बड़ोह में तहसील खुलवाने से लेकर बाथू पुल के निर्माण तक, उनके प्रयासों ने विकास की दिशा बदल दी। पुल बनाने में उन्होंने खुद श्रमदान किया और गाँववालों को भी प्रेरित किया।
खेतों-बागों के साधक
वैद्य तिहडू राम जी का जीवन आत्मनिर्भरता की मिसाल था। उनकी रसोई में कभी बाजार की सब्जी नहीं पकाई जाती थी। सब कुछ उनके अपने खेतों से आता था। उनके बगीचे में हर मौसमी फल मौजूद था।
फलों और औषधीय पौधों से सजे उनके बगीचे में मानो धरती पर हर्बल प्रयोगशाला बसती थी। वे खुद कड़ी मेहनत करते थे और लोगों को मेहनत करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने में हमेशा आगे रहते थे।
अमर स्मृति : सरकार ने बनवाया भवन
चंगर के लिए उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए तत्कालीन मंत्री स्व. जी.एस. बाली ने बाबा बड़ोह में
वैद्य श्री तिहडू राम स्मृति भवन (OBC भवन) बनवाया। यह भवन आज नई पीढ़ी को याद दिलाता है कि कैसे एक साधारण वैद्य ने सेवा और न्याय से लोगों का दिल जीता।
1999 में जब वैद्य श्री तिहडू राम ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तो उनके साथ ही परंपरागत हर्बल चिकित्सा की वह समृद्ध परंपरा भी विलुप्त हो गई। आज भी चंगर की वादियाँ उन्हें श्रद्धा से याद करती हैं, क्योंकि वे सिर्फ शरीर नहीं, समाज की आत्मा को भी स्वस्थ करते थे।
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